चोरी के मोबाइल की वो मंडी, जहां बांग्लादेश से आते हैं खरीददार, ट्रेस नहीं हो पाता EMI नंबर
पेशेवर चोर मोबाइल चोरी का आजकर एक व्यवसाय के तौर पर इस्तेमाल करने लगे हैं। झारखंड में एक मार्केट में चोरी के मोबाइल फोन बेचे जाने का दावा किया जा रहा है।
भारत में मोबाइल चोरी होने के बाद अगर उसे किसी दूसरे किसी देश में बेंच दिया जाए तो सर्विलांस पर लगाने के बाद भी ट्रैसिंग में दिक्कत होती है। अगर ईएमआई ट्रेस भी हो जाय तो भी लोकेशन तक पहुंचने की समस्या है। बिना बांग्लादेश की अनुमति के एक्शन नहीं लिया जाता।
एक रिपोर्ट के मुताबिक मोबाइल चोरीका व्यवसाय जमकर फल फूल रहा है। ऐसे में झारखंड के साहिबाबाद जिले में स्थित तीन पहाड़ इन दिनों चोरी के मोबाइल की मंडी बन चुका है। जहां बांग्लादेश के लोक कम कीमत में लोग चोरी के मोबाइल खरीदने पहुंचते हैं।

बच्चों को मोबइल चोरी की ट्रेनिंग
मोबाइल चोरी के मामले की जांच के बाद झारखंड पुलिस ने कहा कि साहिबगंज जिला अंतर्गत राजमहल और तीनपहाड़ इलाके में बच्चों को मोबाइल चोरी की ट्रेनिंग देने वाली पाठशालाएं चलाई जा रही हैं। इन पाठशालाओं के संचालक बड़ी संख्या में बच्चों को ट्रेंड करने के बाद उन्हें बड़े शहरों और महानगरों में मोबाइल चोरी के लिए भेजते हैं। पुलिस के मुताबिक बच्चों को कम से 8 से 10 मोबाइल चोरी करने का टारगेट मिलता है। प्रत्येक मोबाइल की चोरी करने का रेट फिक्स रहता है। ब्रांड और मोबाइल के फीचर्स व क्वालिटी के हिसाब से बच्चों को मेहनताना मिलता है।
ऐसे काम करता है गिरोह
गिरोह में शामिल बड़ी उम्र वाले लोग बच्चों के इर्द-गिर्द ही खड़े रहते हैं। मोबाइल उड़ाने के तुरंत बाद ये बच्चे उसे बड़ी उम्र वाले सदस्यों को सौंप देते हैं। बड़ी संख्या में चोरी का मोबाइल जमा होने पर गिरोह का बॉस इन्हें लेकर साहिबगंज चला जाता है।
तीनपहाड़ में चोरी के मोबाइल फोन के धंधे में करीब 18-20 लोग सक्रिय हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक चोरी का कीमती मोबाइल तीनपहाड़ में 10 हजार रुपए में मिल जाता है। जबकि बांग्लादेश में इसकी कीमत करीब 20 हजार तक होती है। दरअसल, बांग्लादेश में मोबाइल की मांग बेहतर है।












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