तेलंगाना सरकार पॉवर सेक्टर की स्थिति पर जारी करेगी श्वेत पत्र, सीएम के सामने विभाग की माली हालत की खुली पोल
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल कर सत्ता पर काबिज हुई कांग्रेस सरकार एक्शन मूड में आ चुकी है। तेलंगाना में सत्ता में आते ही जनता को कर्नाटक की तर्ज पर मुफ्त बिजली देने का वादा पूरा करने से पहले नवनियुक्त मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने सबसे पहले ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक की। इस बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि तेलंगाना सरकार जल्द ही राज्य में बिजली सेक्टर की स्थिति पर जल्द ही एक श्वेत पत्र जारी करेगी।

यह निर्णय कथित तौर पर शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में लिया और गहन समीक्षा की। गहन समीक्षा के बाद सीएम रेड्डी ने जताया कि वो तेलंगाना ऊर्जा विभाग के प्रदर्शन से नाखुश हैं,
सरकारी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री रेवंत ने इसके अलावा राज्य के लोगों को 200 यूनिट बिजली मुफ्त उपलब्ध कराने, कांग्रेस की छह गारंटी में से एक और पार्टी के चुनाव घोषणापत्र के हिस्से के कार्यान्वयन पर भी चर्चा की। इस बैठक में मौजूद अधिकारियों ने सीएम मो जानकारी दी कि कांग्रेस सरकार की मुफ्त बिजली योजना पर प्रति वर्ष लगभग 4,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इसके अलावा अधिकारियों ने इस बैठक में सीएम को इस बात से अवगत करवाया कि राज्य के बिजली क्षेत्र पर करीब 81,000 करोड़ रुपये का कर्जा है। कथित तौर पर ये भी जानकारी दी गई कि डिस्कॉम को संचित घाटा लगभग 50,000 करोड़ रुपये था। इसके साथ ही अधिकारियों ने मुख्यमंत्र को ये भी जानकारी दी कि बीते साढ़े नौ वर्षों में पिछली बीआरएस सरकार ने बिजली खरीदने पर लगभग 30,000 करोड़ रुपये खर्च किये।
इसके अलावा ये भी जानकारी दी गई की पिछली सरकार ने बिजली उपयोगिता ऋण पर ब्याज और मूल राशि के लिए हर महीने लगभग 1,300 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही थी।
सीएम रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में बिजली विभाग की इस बैठक में एन उत्तम कुमार रेड्डी, पोन्नम प्रभाकर और पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी उपस्थित थे। मुख्य सचिव शांति कुमारी, मुख्यमंत्री के सचिव वी शेषाद्रि, विशेष मुख्य सचिव (ऊर्जा) सुनील शर्मा, विशेष मुख्य सचिव (वित्त) के रामकृष्ण राव, एसपीडीसीएल और एनपीडीसीएल के सीएमडी उपस्थित थे।












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