Telangana Elections: तेलंगाना में 10 साल बाद सरकार बदलने का चलन, कांग्रेस की बढ़ी उम्मीदें
तेलंगाना के गठन से पूर्व यानी अविभाजित आंध्र में हर दस बाद सरकारें बदल जाती थीं। इस बार तेलंगाना चुनाव को दौरान भी ऐसी ही उम्मीद की जा रही है। हालांकि अब राज्य में कई मोर्चों पर चुनावी समीकरण बदल चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस कापी आश्वस्त नजर आ रही है। इस बार भी कांग्रेस उम्मीद कर रही है कि तेलंगाना में 'हर 10 साल में सरकार बदलने' का चलन जारी रहेगा। ऐसे राज्य के चुनावी समीकरण और पिछले चुनावों परिणामों का जिक्र करना आवश्यक है।
कांग्रेस ने वर्ष 2009 में हुए चुनाव के दौरान अविभाजित आंध्र प्रदेश में कुल 156 सीटों के साथ सरकार बनाई थी। तब तेलंगाना क्षेत्र में कांग्रेस को कुल 49 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वहीं अब दक्षिण के राज्य में पूर्व के हर 10 साल में सत्ता बदलने की परंपरा की चुनावों के बीच चर्चा तेज है।

इससे पहले 2004 से लेकर 2014 तक लगातार दो बार कांग्रेस ने आंध्र में सरकार बनाई। लेकिन 10 साल बाद यहां बड़े बदलावा आया और कांग्रेस सत्ता से दूर हो गई थी। लेकिन अब दावा किया कि जा रहा है कि एक दशक बाद फिर से बदलाव आएगा और अविभाजित आंध्र प्रदेश के हिस्से यानी तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनेगी।
टीपीसीसी अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि तेलंगाना के लोग कांग्रेस की सरकार बनाने जा रहे हैं। इस बीच पार्टी तेलंगाना के कुछ ऐसे वर्ग को साधने के जुगत में जिससे कुछ बड़ा बदलाव किया जा सके। कांग्रेस रेड्डी समुदाय, अल्पसंख्यकों, एससी, एसटी और बीसी के एक महत्वपूर्ण हिस्से से समर्थन हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कांग्रे का लक्ष्य 70 से अधिक सीटें जीतने का है।
वहीं कांग्रेस नेताओं में इस बात को लेकर काफी उत्सुकता है। दावा किया जा रहा है कि जिस प्रकार 10 साल तक वाईएसआर को जनता से जो समर्थन मिला, वैसा ही समर्थन अब कांग्रेस को तेलंगाना की जनता देगी। उम्मीद है कि बीसी, ओसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक जैसे प्रमुख समुदाय पार्टी का भारी समर्थन करेंगे।












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