'तेजपाल भगवान नहीं हैं, जो खुद अपनी करनी की सजा तय करेंगे'

नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न के केस में फंसे तहलका के प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ भाजपा ने भी तीखी टिप्पणी की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने खुले तौर पर कहा है कि तहलका के प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ कार्रवाई अभी तक क्यों नहीं हुई? क्यों नहीं उसे मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल और पी चिंदबरम जैसे लोग गोवा में खोज पाये, क्या इसके पीछे कांग्रेस और तेजपाल के पुराने रिश्ते तो कारण नहीं।

जब दिल्ली गैंगरेप के बाद यह खुले तौर पर कहा गया कि यौन शोषण के खिलाफ हर मुकदमा दर्ज होगा तो अभी तक तेजपाल के केस में नरमी क्यों? जवाब दे सरकार। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि आपराधिक गतिविधि को छिपाया नहीं जा सकता।

मालूम हो कि लगातार हो-हल्ला मचने के बाद गोवा के फाइव स्टार होटल में सहयोगी महिला पत्रकार के साथ कथित छेड़खानी के मामले में तहलका के प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ने के बाद गुरुवार को गोवा सरकार और महिला आयोग ने मामले में सक्रिय होने के संकेत दिए।

तरुण तेजपाल के खिलाफ लगे सनसनीखेज आरोप सामने आने के बाद से राजनीति और पत्रकारिता जगत में उबाल आ गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक दलों और पत्रकारों ने तेजपाल की तीखी आलोचना की है और उन्हें आसानी नहीं छोड़े जाने की अपील की है।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा है, "पूरी तरह से अपराध माने जाने वाले कृत्य के लिए अपने आप व्यक्त किया गया प्रायश्चित उपचार नहीं हो सकता।"

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि पीड़िता को उत्तरी गोवा के एक होटल में घटी घटना के बारे में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उसी होटल में तहलका ने इस माह के शुरू में समारोह का आयोजन किया था। उन्होंने कहा, "जब तक हमारे पास शिकायत नहीं आएगी तब तक हम दोष कैसे साबित करेंगे।" पर्रिकर ने घटना की प्रारंभिक जांच कराने के संकेत दिए और कहा कि राज्य की परिधि में आपराधिक घटना घटी। उन्होंने कहा, "हमें जांच करने की जरूरत है और इसके लिए शिकायत की जरूरत नहीं होती।"

तहलका की प्रबंधक संपादक शोमा चौधरी ने बुधवार को पत्रिका के सभी कर्मचारियों को तेजपाल का संलग्न खत ई-मेल किया। तेजपाल ने इससे पहले शोमा चौधरी को ई-मेल में लिखा, "समझदारी की चूक और परिस्थिति की गलत व्याख्या के कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई, जो हमारे विश्वास और संघर्ष के खिलाफ है।"

उन्होंने लिखा, "मैं पहले ही अपने दुर्व्यवहार के लिए बिना शर्त क्षमा मांग चुका हूं, लेकिन मुझे लगता है कि अभी प्रायश्चित बाकी है। इसलिए मैं तहलका के मुख्य संपादक के पद से और कार्यालय से अगले छह महीने के लिए हटने की पेशकश कर रहा हूं।"

इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने गुरुवार को कहा कि समाचार पत्रिका तहलका के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल द्वारा एक महिला पत्रकार के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला यदि उनके समक्ष उठाया जाता है, तो वह मामले की जांच करेगा।

शर्मा ने तेजपाल द्वारा तहलका के मुख्य संपादक के पद से छह महीने के लिए त्यागपत्र देने की घोषणा पर कहा, "तरुण तेजपाल भगवान नहीं हैं, जो खुद अपनी करनी की सजा तय करेंगे।" वर्ष 2001 में तहलका के स्टिंग आपरेशन से शर्मिदगी का सामना कर चुकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि छेड़खानी करना नई परिभाषा के तहत कानून के तहत दुष्कर्म की श्रेणी में आता है।

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