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तमिलनाडु में जल्द बदल सकता है सियासी समीकरण, DMK के दांव को मात देने के लिए BJP की रणनीति तैयार?

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में राजनीतिक समीकरण जल्द बदल सकते हैं। 2026 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले, एआईएडीएमके (AIADMK) और बीजेपी (BJP) के बीच गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अन्नाद्रमुक नेता एडप्पाडी के पलानीस्वामी (EPS) की दिल्ली यात्रा और गृह मंत्री अमित शाह से बुधवार को हुई उनकी मुलाकात तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

कई रिपोर्ट के मुताबिक पलानीस्वामी एनडीए गठबंधन में वापसी पर चर्चा के लिए ही दिल्ली आए हुए हैं। हालांकि, शाह से मुलाकात के बाद उन्होंने इस तरह की अटकलों का खंडन किया है। लेकिन, यह भी तथ्य है कि अब एआईएडीएमके के पास तमिलनाडु की राजनीति में विकल्प कम रह गए हैं। क्योंकि, आमतौर पर द्रविड़ राजनीति के धुरंधर सियासी चर्चाओं के लिए अबतक चेन्नई को ही अहमियत देते आए हैं, लेकिन पलानीस्वामी को दिल्ली दरबार में हाजिरी लगानी पड़ी है।

tamil nadu politics

Tamil Nadu Politics: AIADMK की रणनीतिक वापसी के संकेत

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके और बीजेपी के रिश्तों में 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों में डीएमके की प्रचंड जीत के बाद पहले वाली गर्माहट नहीं रह गई थी। सितंबर 2023 में यह गठबंधन (एनडीए) औपचारिक रूप से टूट गया।

लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में फिर से डीएमके के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद अन्नाद्रमुक के लिए जिस तरह से राजनीतिक संभावनाएं बहुत ही सीमित होती जा रही हैं, उससे लगता है कि उसने भाजपा को लेकर अपना मन बदलने का फैसला कर लिया है।

Tamil Nadu NDA: BJP के लिए रणनीतिक अवसर

BJP तमिलनाडु में अपनी पकड़ लंबे वक्त से मजबूत करना चाहती है। हालांकि, पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में कोई सीट नहीं मिली, लेकिन उसका वोट शेयर जरूर बढ़ा है और इसके लिए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई की आक्रामक राजनीति को सराहा जाता है। माना जाता है कि उनकी वजह से बीजेपी संगठन का मनोबल हाई हुआ है।

ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी के लिए अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन करना अब बहुत लाभकारी साबित हो सकता है, क्योंकि इससे पार्टी को विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी। भाजपा के शीर्ष स्तर से भी इस गठबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

Tamil Nadu News: गठबंधन की नई शर्तें क्या हो सकती हैं?

रिपोर्ट के अनुसार AIADMK की ओर से गठबंधन को लेकर कुछ शर्तें रखी गई हैं। इनमें प्रमुख हैं:

1.स्टेयरिंग कमेटी का गठन: BJP और AIADMK के बीच तालमेल के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनेगी, जिसके अधिकार अन्नामलाई से अधिक होगी।

2.बागी नेताओं से दूरी: अन्नाद्रमुक के बागी नेताओं टीटीवी दिनाकरन और ओ पन्नीरसेल्वम को पार्टी में वापस लाने का दबाव नहीं डाला जाएगा।

3.AIADMK की स्वायत्तता: भाजपा, एआईएडीएमके के कार्यों में बहुत ज्यादा दखल नहीं देगी।

Tamil Nadu Political News: EPS की मजबूरी और BJP का दबाव

माना जा रहा है कि एआईएडीएमके के पास अब बीजेपी से गठबंधन के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। पहले, पार्टी ने वामपंथी दलों और वीसीके (VCK-विदुथलाई चिरुथैगल काची) को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वे एमके स्टालिन की पार्टी के साथ ही बने रहे।

भाजपा भी तमिलनाडु में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिशों में लगातार लगी हुई है। पार्टी नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अन्नाद्रमक के साथ नए सिरे से गठबंधन के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों पर। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना है।

Tamil Nadu BJP: अन्नामलाई की भूमिका और RSS का मार्गदर्शन!

इस गठबंधन में अबतक सबसे बड़ी बाधा तमिलनाडु बीजेपी BJP के अध्यक्ष के अन्नामलाई के आक्रामक रवैए को माना जाता रहा है। कहा जाता है कि 2023 में अन्नाद्रमुक के नेताओं पर उनके हमलों ने गठबंधन तोड़ने में प्रमुख भूमिका निभाई थी।

हालांकि, अब आरएसएस और बीजेपी नेतृत्व ने अन्नामलाई को अपनी भाषा संयमित रखने की सलाह दी है। यह संकेत है कि बीजेपी भी एआईएडीएमके के साथ अपने संबंध सुधारने के लिए तैयार है।

Tamil Nadu Politics: 2024 के लोकसभा चुनाव का परिणाम बन गया दोनों की रणनीति बदलने की वजह?

अन्नामलाई जब पिछले साल के आखिर में विदेश से फेलोशिप पूरी करके लौटे थे, तभी से उन्होंने इस गठबंधन को लेकर अपने सुर नरम कर लिए थे। इसका बड़ा कारण 2024 के लोकसभा चुनावों का नतीजा माना गया, जिसमें बीजेपी ने 11.38% वोट तो जुटाए, लेकिन खाता नहीं खोल सकी।

वहीं एआईएडीएमके को भी 20.66% वोट मिले, फिर भी सीट नहीं मिली। जबकि, इंडिया ब्लॉक की अगुवाई डीएमके को गठबंधन की राजनीति का फायदा हुआ और उसने मात्र 27.21% वोट लेकर भी 22 सीटें (कुल 39 सीट) जीत लीं। बाकी सीटें भी डीएमके के अन्य सहयोगियों को मिलीं, जिसमें कांग्रेस ने 9 पर कब्जा कर लिया।

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