तमिलनाडु सरकार ने Jallikattu के आयोजन को दी अनुमति, लेकिन मानने होंगे कोरोना से जुड़े ये नियम
नई दिल्ली। Jallikattu: तमिलनाडु सरकार ने राज्य में जल्लीकट्टू के आयोजन को लेकर अनुमति दे दी है। लेकिन इसके साथ ही कुछ शर्तों को भी जोड़ दिया है। सरकार ने कहा है कि आयोजन के दौरान कोरोना वायरस से जुड़े नियमों का पालन करना होगा, ताकि इसके संक्रमण को रोका जा सके। सरकार ने जो दिशा-निर्देश जारी किए हैं, उनके अनुसार, आयोजन में 300 से अधिक सांड मालिक नहीं आ सकते हैं। साथ ही 150 से अधिक लोग आयोजन समारोह में हिस्सा नहीं ले सकते।

आयोजन स्थल पर दर्शकों की कुल क्षमता के 50 फीसदी लोग ही आ सकते हैं। सभी की प्रवेश के दौरान थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। सभी का कोविड-19 टेस्ट किया जाएगा। इसके साथ ही यहां मौजूद सभी लोगों का मास्क पहनकर आना अनिवार्य होगा।
क्या है जल्लीकट्टू?
आसान भाषा में कहें तो जल्लीकट्टू एक तरह का खेल है, जो मट्टू पोंगल का हिस्सा है। मट्टू पोंगल यानी चार दिन तक चलने वाले त्योहार पोंगल का तीसरा दिन। तमिल भाषा में मट्टू का मतलब सांड होता है और पोंगल का तीसरा दिन पशुओं को समर्पित है। जो खेती की प्रक्रिया में सबसे प्रमुख माने जाते हैं। सांड को गाय से अधिक अहमियत दी जाती है क्योंकि वह किसानों की खेत की जुताई में, सामान को ढोने में और गाय के गर्भधारण में मदद करते हैं। जिसकी वजह से ही उन्हें दूध मिल पाता है।
हालांकि जल्लीकट्टू को एक खतरनाक खेल माना जाता है। आंकड़ों की मानें तो साल 2010 से 2014 के बीच इस खेल के दौरान 17 लोगों की जान चली गई है और 1100 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं। बीते करीब 20 साल के आंकड़ों को देखें तो इस खेल के कारण 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है। जिसके चलते 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इसपर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन तमिलनाडु में इसका काफी विरोध किया गया। लोग इस खेल के आयोजन की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए थे, जिसके बाद राज्य की सरकार ने एक अध्यादेश पास कर इसके आयोजन की अनुमति दी।
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