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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि आज, रहस्यमयी मौत के 72 साल! न हुई जांच, न मिला जवाब

Dr Syama Prasad Mookerjee Death Anniversary: भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जो सालों बाद भी रहस्य बनी रहती हैं। एक ऐसा ही मामला है डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत का। देश के पहले मंत्रिमंडल के सदस्य, जनसंघ के संस्थापक और प्रखर राष्ट्रवादी नेता रहे डॉ. मुखर्जी की मौत 23 जून 1953 को जम्मू-कश्मीर की हिरासत में हुई थी।

न मुकदमा चला, न उन्हें जमानत मिली, और न ही उनके परिवार को मौत से पहले कोई जानकारी दी गई। इस दुखद घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, लेकिन फिर भी न तो केंद्र सरकार ने, न ही राज्य सरकारों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई। उनके निधन के बाद संसद से लेकर विधानसभा तक आवाज उठी, लेकिन सवाल आज भी वहीं के वहीं हैं-डॉ. मुखर्जी की मौत के पीछे सच क्या था?

Syama Prasad Mookerjee Death Anniversary

आज श्याम प्रसाद मुखर्जी की मौत को 72 साल हो चुके हैं। 23 जून 1953 की सुबह जब श्यामा प्रसाद का निधन हुआ तब वह सिर्फ 52 साल के थे। मई 1953 में उन्हें जम्मू-कश्मीर सरकार ने बिना किसी मुकदमे के हिरासत में ले लिया था। वह भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे, जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) बना।
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जिनेवा में मिली नेहरू को दुखद खबर

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को जब यह खबर मिली, तब वह जिनेवा में थे। श्यामा प्रसाद की मां जोगमाया देवी ने नेहरू को एक भावुक पत्र लिखा, "मेरा बेटा बिना मुकदमे के हिरासत में मारा गया... आपने कश्मीर का दौरा किया था, लेकिन आप उससे मिलने क्यों नहीं गए? क्या आपको उसकी सेहत की परवाह नहीं थी?" मां को अपने बेटे की मौत की सूचना पहली बार सरकार से ही मिली, वो भी बेहद असंवेदनशील ढंग से।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में उठी जांच की मांग

23 जून को हुई मौत के बाद, 27 नवंबर 1953 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस मौत की जांच की मांग करते हुए प्रस्ताव लाया गया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के किसी जज की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया जाए।

कांग्रेस नेताओं ने संशोधन प्रस्ताव रखा

कांग्रेस नेता शंकर प्रसाद मित्रा ने इस प्रस्ताव में संशोधन करते हुए कहा कि जांच की मांग केंद्र सरकार की बजाय जम्मू-कश्मीर सरकार से की जानी चाहिए। उनका तर्क था कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त है और केंद्र सरकार वहां जांच आयोग गठित करने के लिए सक्षम नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय ने भी इसी संविधानिक स्थिति का हवाला देते हुए संशोधन का समर्थन किया।

विपक्ष ने जताई नाराजगी

कई नेताओं ने कांग्रेस के रुख पर आपत्ति जताई। विधायक सुधीर चंद्र राय चौधरी ने पूछा कि जब मुख्यमंत्री ने पहले जांच को जरूरी माना, तो अब क्यों इनकार कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि यदि आरोप जम्मू-कश्मीर सरकार पर है, तो जांच उसी सरकार से करवाना न्यायसंगत नहीं होगा।

केंद्र सरकार ने बात आगे नहीं बढ़ाई

विधानसभा में पारित प्रस्ताव को केंद्र के स्टेट्स मंत्रालय ने 26 फरवरी 1954 को स्वीकार किया, लेकिन इसके बाद महीनों कोई कार्यवाही नहीं हुई। आखिरकार 22 सितंबर को प्रस्ताव को जम्मू-कश्मीर सरकार को भेज दिया गया, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। जांच कभी नहीं हुई।

संसद में सवाल पूछने से भी रोका गया

लोकसभा में पूछा गया कि क्या पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री डॉ. रॉय ने जम्मू-कश्मीर जाकर कोई जांच की? लेकिन गृह मंत्रालय ने इसे "जम्मू-कश्मीर सरकार का मामला" बताते हुए सवाल को खारिज करवा दिया। 26 जुलाई 1954 की प्रश्नसूची में यह सवाल अस्वीकार कर दिया गया।

डॉ. रॉय ने देखे थे बंगले और अस्पताल के कमरे

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव गुलाम अहमद ने 5 अगस्त 1954 को जानकारी दी कि डॉ. रॉय निजी अवकाश पर कश्मीर आए थे और उन्होंने उस बंगले और अस्पताल के कमरे को देखा था, जहां डॉ. मुखर्जी को रखा गया था। लेकिन उन्होंने कोई आधिकारिक जांच नहीं की और न ही कोई रिपोर्ट सौंपी।

तीनों सरकारों की चुप्पी से रहस्य बरकरार

केंद्र, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल-तीनों ही सरकारों ने इस असामयिक मृत्यु की जांच कराने में गंभीरता नहीं दिखाई। देश के एक वरिष्ठ नेता की हिरासत में मौत पर आज भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। 72 साल बाद भी यह मामला रहस्य बना हुआ है।

पुण्यतिथि पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को किया गया याद

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उनको याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा। पीएम ने लिखा, "डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन। उन्होंने देश की अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए अतुलनीय साहस और पुरुषार्थ का परिचय दिया। राष्ट्र निर्माण में उनका अमूल्य योगदान हमेशा श्रद्धापूर्वक याद किया जाएगा।"

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को साकार करने का अवसर मिला। प्रसाद जी के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि देने में 66 साल लग गए, जब देश से अनुच्छेद 370 को हटाया गया..."


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