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सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि: पूर्व विदेश मंत्री के वे आखिरी शब्द जो उनके साथ ही देश में 'अमर' हो गए

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की रविवार को चौथी पुण्यतिथि है। उनकी अनोखी भाषण शैली की कमी आज संसद में सत्तापक्ष ही नहीं, विपक्ष को भी खलती है। देश की राजनीति में पद्म विभूषण से सम्मानित इस नेता का जब भी नाम आता है तो उनके बेबाक अंदाज और उनकी वाक्पटुता सबको याद आ जाती है।

राजनीति में यह सुषमा स्वराज का ही कमाल था कि सिर्फ 25 की उम्र में उन्हें हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और जब उनका देहांत हुआ तो भी वह भारतीय सियासत में शीर्ष चेहरे के तौर पर कायम थीं।

sushma swaraj punya tithi

देश की राजनीति में कई कीर्तिमान
देश के राजनीतिक इतिहास में सुषमा स्वराज के नाम कई कीर्तिमान हैं। वह भारत में किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल की महिला प्रवक्ता बनने वाली पहली राजनेता थीं। वहीं उनके नाम दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का भी रिकॉर्ड दर्ज है। भले ही वह कार्यकाल महज 52 दिन का ही रहा हो।

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2019 में वह अपने देहांत के साथ ही एक और सियासी अध्याय से जुड़ गईं, जो भारतीय राजनीति के इतिहास में अब अमर बन चुका है। 5 अगस्त, 2023 को देश ने जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 के खत्म होने की चौथी वर्षगांठ मनाया है। उसके ठीक अगले दिन सुषमा स्वराज की चौथी पुण्यतिथि मनाई है। इन दोनों घटनाक्रमों का बहुत ही विशेष संबंध बन चुका है।

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'अमर' हो गया सुषमा स्वराज का वह आखिरी ट्वीट
क्योंकि, जब 5 अगस्त, 2019 को केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए जैसे प्रावधानों को हटाने का फैसला किया और अगले दिन यानी 6 अगस्त, 2019 को इन दोनों फैसलों पर संसद की मुहर लगी तो दिल्ली के एम्स अस्पताल के बेड से उन्होंने एक ट्वीट किया था।

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'मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी'
सुषमा स्वराज के उस आखिरी ट्वीट के आखिरी शब्द 'अमर' बन चुके हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के लिए पीएम मोदी को बधाई दी और उनका अभिनंदन करते हुए लिखा-
'प्रधानमंत्री जी - आपका हार्दिक अभिनन्दन। मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।' इसके कुछ ही घंटों बाद उस नेता ने अपने जीवन की आखिरी सांसें लीं।

पार्टी प्रवक्ता बनने के बाद लोगों ने देखी उनकी प्रतिभा
1952 में हरियाण की अंबाला छावनी में जन्मीं सुषमा ने बैचलर्स की पढ़ाई संस्कृत और राजनीति शास्त्र विषयों से की थी। फिर चंडीगढ़ से लॉ करने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू किया। लेकिन, राजनीति में उनकी प्रतिभा की झलक लोगों तक तब पहुंची जब वह भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता के तौर पर दल के विचारों से लोगों को रूबरू कराने लगीं।

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कुछ ही दिनों में कन्नड़ बोलने लगीं
सुषमा स्वराज की बहुयामी प्रतिभा में विभिन्न भाषाओं पर उनकी अच्छी पकड़ ने हमेशा महत्वपूर्ण योगदान दिया। वह हिंदी और अंग्रेजी बोलने में तो पारंगत थी हीं, संस्कृत और पंजाबी भाषा पर भी उनकी अच्छी पकड़ थी। उनकी इस प्रतिभा की असली झलक लोगों ने तब देखी जब वो कर्नाटक के बेल्लारी में सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने पहुंचीं। कहते हैं कि कुछ ही दिनों में वह ठीक-ठाक कन्नड़ बोलने लग गईं।

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उनकी इस कला का देश को तब बहुत फायदा मिला, जब विदेश मंत्री के तौर पर वह विदेशी मंचों पर भारत का पक्ष रखने लगीं। जब वह विदेश मंत्री थीं, तो एक तरह से आम जनता की विदेश मंत्री बनकर उभरीं। दुनिया के किसी भी देश में जब भी किसी भारतीय को जरूरत महसूस हुई, उन्होंने सीधे सुषमा से संपर्क कोशिश करने की कोशिश की और विदेश मंत्री ने उस तक हर संभव सहायता पहुंचायी।

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