Pollution पर हिलाने वाला सर्वे: Delhi-NCR के 40 फीसदी लोग शहर छोड़ना चाहते हैं

नई दिल्ली- प्रदूषण के बढ़ते खतरे और रोजाना खराब से और ज्यादा खराब होती जा रही जहरीली हवा के खतरे को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर के 40 फीसदी से ज्यादा निवासी दूसरे शहरों में जाना चाहते हैं। ये खुलासा प्रदूषण को लेकर किए गए एक हालिया सर्वे के बाद सामने आया है। इस सर्वे में कई और ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो बेहद गंभीर और चौंकाने वाले हैं। सर्वे में जितने लोग शामिल हुए हैं उनमें से 86 फीसदी लोग अबतक किसी न किसी रूप में इसके चलते स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से कई लोगों को डॉक्टरों के पास जाना पड़ा है या वे अस्पतालों का चक्कर लगा रहे हैं।

ऑनलाइन सर्वे में आए कई चौंकाने वाले परिणाम

ऑनलाइन सर्वे में आए कई चौंकाने वाले परिणाम

दिल्ली-एनसीआर के 1,700 से ज्यादा लोगों पर किए गए सर्वे में ये जानकारी सामने आई है कि यहां के सिर्फ 13 फीसदी निवासी ही मानते हैं कि उनके पास प्रदूषण के बढ़ते स्तर को भुगतने के अलावा कोई उपाय नहीं है। जबकि, 16 फीसदी लोग ऐसे मिले हैं, जो चाहते हैं कि जिस दौरान दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर को छूता है, वह यहां से निकलकर कहीं दूसरी जगह पर समय बिचाने के लिए चले जाएं। बाद में जब प्रदूषण का स्तर सामान्य हो जाए तो वह वापस यहां लौट आने की सोच रहे हैं। हालांकि, 31 फीसदी लोग ऐसे भी हैं जो चाहते हैं कि वह दिल्ली-एनसीआर में रहकर ही प्रदूषण का मुकाबला करें। इसके लिए वह एयर प्यूरिफायर, मास्क या पौधों को उपाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। यह सर्वे एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल्स ने कराया है।

40% लोग दूसरे शहरों में बसना चाहते हैं

40% लोग दूसरे शहरों में बसना चाहते हैं

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल्स के सर्वे का सबसे चौंकाने वाला खुलासा ये है कि दिल्ली-एनसीआर के 40 फीसदी लोग अब प्रदूषण से इतना घबरा रहे हैं कि वह इलाके को छोड़कर किसी दूसरे शहर में जाकर बसने का मन बनाने लगे हैं। जब दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण पीड़ित लोगों से सवाल किया गया कि पिछले हफ्ते उन्होंने इसका सामना किस तरह से किया तो 13 फीसदी लोगों का कहना था कि उनमें से एक या अधिक लोग पहले ही अस्पताल का चक्कर लगा चुके हैं। जबकि 29 फीसदी लोगों ने जवाब दिया कि उनमें से एक या अधिक लोगों को डॉक्टरों के पास जाना पड़ा है। इनमें सबसे बड़ा आंकड़ा यानि 44 फीसदी ऐसे लोगों का है, जिनका कहना है कि प्रदूषण की वजह से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्या का सामना करना पड़ा है, लेकिन वे अस्पताल या डॉक्टर के पास नहीं जा सके हैं। जबकि, सर्वे करने वाले लोगों को सिर्फ 14 फीसदी ही ऐसे लोग मिले, जिन्होंने बताया है कि प्रदूषण की वजह से उन्हें सेहत को लेकर अभी तक कोई दिक्कत नहीं हुई है।

कई इलाकों में 999 तक पहुंचा एक्यूआई

बता दें कि रविवार दोपहर में एनसीआर के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स का मीटर 999 तक पहुंच गया, जो कि 'गंभीर से भी ज्यादा' के स्तर से भी खतरनाक है। बता दें कि जब एक्यूआई 0-50 के बीच होता है तो उसे 'अच्छा', 51-100 को 'संतोषजनक', 101-200 को 'मध्यम', 201-300 को 'खराब', 301-400 को 'बहुत खराब' और 401-500 को 'गंभीर' और उससे ज्यादा को 'बहुत ज्यादा गंभीर' की श्रेणी में माना जाता है। प्रदूषण की इसी भयावह स्थिति को देखते हुए रविवार को गाजियाबाद और नोएडा के स्कूलों में भी 5 नवंबर तक छुट्टियों की घोषणा कर दी गई है। जबकि, दिल्ली के स्कूलों में इस छुट्टी की घोषणा शुक्रवार को ही कर दी गई थी। इस बीच कम विजिविलिटी के मद्देनजर रविवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर 37 फ्लाइट को डायवर्ट करना पड़ा।

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