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हाईकोर्ट के जज के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 7 जजों की बेंच करेगी सुनवाई, अवमानना का है आरोप

कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी क्योंकि उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस समेत कई जजों पर गंभीर आरोप लगाए थे।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की है। देश में ऐसा पहली बार हो रहा है जब शीर्ष अदालत ने वर्तमान और रिटायर्ड जजों के भ्रष्टाचार के मामलों में स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने मंगलवार को फैसला लिया है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी क्योंकि उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस समेत कई जजों पर गंभीर आरोप लगाए थे।

चीफ जस्टिस के अलावा होंगे छह सीनियर जज

चीफ जस्टिस के अलावा होंगे छह सीनियर जज

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को भी इस मामले की सुनवाई करेगा। इसमें चीफ जस्टिस के अलावा छह अन्य सीनियर जज शामिल होंगे। इनमें जस्टिस दीपक मिसरा, जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर, पीसी घोसे और कुरियन जोसेफ होंगे। ऐसे मामले पहले भी चीफ जस्टिस के पास आते रहे हैं और उन्होंने संसद को संबंधित जज के खिलाफ कार्रवाई करने और केस शुरू करने के लिए लिखा होगा। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोर्ट खुद किसी जज के खिलाफ सुनवाई करने जा रहा है।

जातिगत भेदभाव का लगाया था आरोप

जातिगत भेदभाव का लगाया था आरोप

कर्णन ने साल 2015 में मद्रास हाईकोर्ट को मुश्किल में डाल दिया था जब उन्होंने चीफ जस्टिस संजय के कौल के खिलाफ अवमानना का केस करने की धमकी दी थी। कौल को कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने का प्रस्ताव दिया है। कर्णन ने कौल पर काम न करने का आरोप लगाया था और दूसरे जज की शैक्षिक योग्यता पर सवाल खड़े किए थे। विवादों में घिरे जज ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जाति की वजह से भेदभाव का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस उन्हें दलित की वजह से प्रताड़ित कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लगा दी थी रोक

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लगा दी थी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने जब कर्णन का ट्रांसफर कर दिया तो उन्होंने खुद उस आदेश पर स्टे लगा दिया और चीफ जस्टिस को सलाह दी कि उनके न्याय क्षेत्र में दखल न दें। हालांकि बाद में उन्होंने अपना ट्रांसफर स्वीकार कर लिया था। इस केस के यहां तक पहुंचने में काफी समय लगा है। अगर वह दोषी करार दिए जाते हैं और जेल भेज दिए जाते हैं तो उनकी नौकरी का क्या होगा, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या उनकी नौकरी खुद ब खुद चली जाएगी या फिर सुप्रीम कोर्ट उन्हें हटाने के लिए संसद को प्रस्ताव भेजेगा।

20 जजों पर लगाए थे आरोप

20 जजों पर लगाए थे आरोप

जस्टिस कर्णन ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर 'न्‍यायपालिका में भारी भ्रष्‍टाचार' के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। 23 जनवरी को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कथित 'भ्रष्टाचारी जजों' की लिस्ट भी दी थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 20 जजों के नाम थे। मामले को देखते हुए चीफ जस्टिस ने तत्काल इसमें एक्शन लिया और सात जजों की विशेष बेंच गठित कर दी। यह बेंच अब मामले की सुनवाई करेगी।

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