Supreme Court Judge: सुप्रीम कोर्ट में अब 34 नहीं, बल्कि इतने होंगे जज! केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी
Supreme Court Judge Count India: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। वर्तमान में प्रधान न्यायाधीश (CJI) सहित जजों की कुल स्वीकृत संख्या 34 है, जिसे अब बढ़ाकर 38 करने की योजना है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार आगामी संसदीय सत्र में एक विशेष विधेयक पेश करेगी।
जजों की संख्या में यह 12% की वृद्धि मुख्य रूप से अदालतों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने और लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल सके।

कैबिनेट का नया फैसला
सरकार का यह निर्णय न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल है। अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में 1 मुख्य न्यायाधीश और 33 अन्य न्यायाधीश कार्यरत हैं। 4 नए पद सृजित होने से संवैधानिक पीठों के गठन और महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। संसद से विधेयक पारित होने के बाद यह बदलाव आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा, जिससे न्याय प्रक्रिया की बाधाएं दूर होंगी।
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जजों की संख्या का इतिहास
1956 में मूल कानून के तहत जजों की संख्या केवल 10 निर्धारित थी। वक्त के साथ मुकदमों का अंबार बढ़ा, तो इस संख्या को भी बढ़ाया गया। 1960 में इसे 13, 1977 में 17 और 1986 में 25 किया गया। साल 2009 में जजों की संख्या 30 तक पहुंचाई गई। पिछली बार 2019 में एक संशोधन के जरिए संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 (मुख्य न्यायाधीश के अलावा) किया गया था। यह क्रमिक विस्तार बढ़ती जनसंख्या और कानूनी पेचीदगियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया है।
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नियुक्ति की कॉलेजियम व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए 'कॉलेजियम सिस्टम' का पालन किया जाता है। यह एक विशेष समूह होता है जिसमें देश के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जज शामिल होते हैं। यही समूह नामों पर विचार करता है और केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें भेजता है। सरकार की जांच के बाद, अंतिम मुहर राष्ट्रपति द्वारा लगाई जाती है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि जजों के चयन में निष्पक्षता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाए।
योग्यता और कार्यकाल
सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए सख्त मापदंड तय हैं। उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना अनिवार्य है। उसे किसी हाई कोर्ट में कम से कम 5 साल तक जज रहने का अनुभव हो, या उसने 10 साल तक वकील के रूप में वकालत की हो। राष्ट्रपति की दृष्टि में वह एक प्रसिद्ध विधिवेत्ता (कानून का जानकार) भी हो सकता है। नियुक्ति के बाद, जज 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर सेवा दे सकते हैं, जिसके बाद वे सेवानिवृत्त हो जाते हैं।












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