गैर-ब्राह्मण पुजारियों की नियुक्ति: सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का तमिलनाडु सरकार को नोटिस
भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण को अधिकृत करने वाले राज्य के कानून और गैर-ब्राह्मणों पुजारी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा है।
नई दिल्ली, 29 अगस्त: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार को एक नोटिस भेजा है। चुनौती देनी वाली एक याचिका पर जवाब मांगा है। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण को अधिकृत करने वाले राज्य के कानून और गैर-ब्राह्मणों पुजारी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा है।

तमिलनाडु में सत्ता में आने के तुरंत बाद डीएमके सरकार ने सभी जातियों को मंदिर के पुजारी के रूप में नियुक्त करने के अपने चुनावी वादे को लागू किया था। 14 अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विभिन्न समुदायों के प्रशिक्षित 'आर्चक' को धर्मस्थलों में पुजारी नियुक्त किया। हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग ने ऐसे 208 पुजारियों को नियुक्ति पत्र दिए।
इसमें 24 आवेदक ऐसे हैं जिन्होंने हिंदू मंदिरों में पुजारी बनने के लिए औपचारिक रूप से एक सरकारी केंद्र में प्रशिक्षण पूरा किया था और 34 अन्य जिन्होंने 'अर्चक' प्रशिक्षण पूरा किया था। गैर-ब्राह्मण पुजारियों की नियुक्ति के तुरंत बाद भाजपा सांसद स्वामी ने कहा कि सीएम स्टालिन, अपने पिता एम करुणानिधि की तरह मंदिर के पुजारियों की पोस्टिंग में हस्तक्षेप कर रहे हैं। इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी।
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