सुप्रीम कोर्ट ने हरीश साल्वे को एमिकस क्यूरी पद से किया मुक्त, खुद ही किया था पद से हटने का अनुरोध
नई दिल्ली, अप्रैल 23। देश में कोरोना संकट और ऑक्सीजन की कमी से हो रही मौतों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से रोजाना होने वाली मौतों को लेकर सवाल किया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को एक नोटिस भी भेजा। दरअसल, चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने शुक्रवार को भी सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना संक्रमण की स्थिति को लेकर देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं को अपने पास ट्रांसफर कर लिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था, लेकिन हरीश साल्वे ने खुद को इस पद से हटने की अनुमित मांगी और सुप्रीम कोर्ट ने ये अनुमति भी दे दी है।
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हरीश साल्वे ने क्यों उठाए थे सवाल?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरीश साल्वे ने ये कहते हुए इस पद से हटने की अनुमति मांगी थी कि उन्हें कोविड संबंधित मामले में न्याय मित्र बनाए जाने पर कुछ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की आलोचना की है। हरीश साल्वे ने कहा कि मैं नहीं चाहता कि मामले में फैसले के पीछे यह कहा जाए कि मैं चीफ जस्टिस का काफी करीबी हूं।
हरीश साल्वे को पद मुक्त करने वाली बेंच ने कहा है कि हमें ये जानकर बहुत दुख हुआ है कि मामले में साल्वे को न्याय मित्र नियुक्त किए जाने पर कुछ वरिष्ठ वकील क्या कह रहे हैं।" साथ ही कहा कि यह बेंच में शामिल सभी न्यायाधीशों का ''सामूहिक निर्णय" था।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई वर्चुअल मीडिया प्लेटफॉर्म इस मामले में हरीश साल्वे को एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त करने की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं।












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