कोर्ट की अवमानना मामला: कुणाल कामरा बोले-न माफी मांगूंगा, न जुर्माना भरूंगा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने शुक्रवार को माफी मांगने से इनकार कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि कोई वकील नहीं, कोई माफी नहीं, कोई जुर्माना नहीं, समय की बर्बादी नहीं। उन्‍होंने कहा कि उन्‍होंने 'सुप्रीम कोर्ट जजों और देश के सबसे बड़े कानूनी अधिकारी जैसी ऑडियंस मिली है, वो शायद सबसे वीआईपी है। बता दें कि कुणाल ने सु्प्रीम कोर्ट द्वारा एकंर अर्नब गोस्वामा को जमानत दिए जाने पर सवाल उठाए थे।

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    Supreme Court Contempt Case : Kunal Kamra ने कहा- न माफी मांगूंगा, न वकील करूंगा | वनइंडिया हिंदी
    पक्षपाती फैसले के प्रति मेरा नजरिया: कुणाल

    पक्षपाती फैसले के प्रति मेरा नजरिया: कुणाल

    अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल द्वारा कुणाल कामरा के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की सहमति देने के एक दिन बाद, स्टैंड-अप कॉमेडियन ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के जजों और सरकार के टॉप अधिकारियों के खिलाफ खुला खत जारी करते हुए लिखा कि, प्रिय जजों, श्री केके वेणुगोपाल जी, मैंने हाल ही में जो ट्वीट किए, उन्‍हें न्‍यायालय की अवमानना बताया गया है। मैंने जो भी ट्वीट किए वे सुप्रीम कोर्ट के एक प्राइम टाइम लाउडस्‍पीकर के पक्ष में दिए गए पक्षपाती फैसले के प्रति मेरा नजरिया था।

    'सुप्रीम कोर्ट के सामने वक्‍त मिल पाना दुर्लभ होगा'

    'सुप्रीम कोर्ट के सामने वक्‍त मिल पाना दुर्लभ होगा'

    कुणाल ने लिखा कि, मुझे लगता है कि मुझे यह मान लेना चाहिए कि मुझे अदालत लगाने में बड़ा मजा आता है और अच्‍छी ऑडियंस पसंद आती है। सुप्रीम कोर्ट जजों और देश के शीर्ष कानूनी अधिकारी जैसी ऑडियंस शायद सबसे वीआईपी हो। लेकिन मुझे समझ आता है कि मैं किसी भी जगह परफॉर्म करूं, सुप्रीम कोर्ट के सामने वक्‍त मिल पाना दुर्लभ होगा।

     'निजी स्‍वतंत्रता के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की चुप्‍पी बिना आलोचना के नहीं गुजर सकती'

    'निजी स्‍वतंत्रता के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की चुप्‍पी बिना आलोचना के नहीं गुजर सकती'

    कुणाल ने लिखा कि, मेरी राय नहीं बदली है क्‍योंकि दूसरों की निजी स्‍वतंत्रता के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की चुप्‍पी बिना आलोचना के नहीं गुजर सकती। मैं अपने ट्वीट्स वापस लेने या उनके लिए माफी मांगने की मंशा नहीं रखता हूं। मुझे लगता है कि वे यह खुद बयान करते हैं। मैं अपनी अवमानना याचिका, अन्‍य मामलों और व्‍यक्तियों जो मेरी तरह किस्‍मतवाले नहीं हैं, की सुनवाई के लिए समय मिलने (कम से कम 20 घंटे अगर प्रशांत भूषण की सुनवाई को ध्‍यान में रखें तो) की उम्‍मीद रखता हूं। क्‍या मैं यह सुझा सकता हूं कि नोटबंदी से जुड़ी याचिका, J&K के विशेष दर्ज को रद्द करने वाले फैसले के खिलाफ याचिका, इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड्स की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिका और अन्‍य कई ऐसे मामलों में सुनवाई की ज्‍यादा जरूरत है।

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