सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- मुख्य सचिव के बच्चों को भी पिछड़ा मान आरक्षण दिया जाए?
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नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर सुनवाई हुई। इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली 5 सदस्यीय बेंच ने कई सवाल किये। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछड़ेपन के आधार पर रोजगार में प्रवेश स्तर का आरक्षण कोई समस्या नहीं है। लेकिन कोर्ट को सभी एससी/एसटी कर्मचारियों को पदोन्नति देने में आरक्षण को आधार बनाने को लेकर चिंता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई शख्स आरक्षण का लाभ लेकर मुख्य सचिव बन जाता है तो क्या उसके बच्चों को भी पिछड़ा मान कर नौकरी में प्रोन्नति में आरक्षण दिया जाए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी। वहीं, सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने वर्ष 2006 के नागराज जजमेंट का जिक्र करते हुए कहा कि क्रीमी लेयर समानता की कसौटी थी और समानता महज औपचारिक नहीं, बल्कि वास्तविक होनी चाहिए।
प्रमोशन में आरक्षण के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसमें कहा गया है कि आरक्षण का कानून बिना बहस के ही दोनों सदनों में पारित कर दिया गया, यह बहुत ही खतरनाक है। साथ ही ये भी कहा गया कि नागराज के फैसले को तभी आगे भेजा जाए जब उसका मूल कमजोर हो और संतुलन के बगैर आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।
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