'आरोपी जानते थे कि अंजलि कार के नीचे फंसी है...', कंझावला कांड में दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा
कंझावलाकांड: 31 दिसंबर की रात स्कूटी से जा रही अंजलि सिंह को मारुति सुजुकी बलेनो कार धक्का मारा, जिसके बाद वह कार के निचले हिस्से में फंसी और 12 किलोमीटर तक घसीटी गई। जिससे उसकी मौत हो गई।

Sultanpuri hit and drag case: कंझावला सुल्तानपुरी हिट एंड ड्रैग मामले में गिरफ्तार पांचों आरोपियों ने खुलासा किया है कि उन्हें पता था कि अंजलि सिंह उनकी ग्रे रंग की मारुति सुजुकी बलेनो कार के नीचे फंसी हुई है, लेकिन डर के मारे गाड़ी चलाते रहे। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने खुद ये कबूला है कि उन्हे पता था कि कार के निचले हिस्से में अंजलि फंसी हुई है। पुलिस ने कहा कि उनके कबूलनामे के आधार पर आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) को मामले में जोड़ा गया था। हालांकि, पुलिस के सामने अभियुक्त द्वारा खुलासा अदालत में स्वीकार्य नहीं है।

आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में
आरोपी अमित खन्ना, दीपक खन्ना, कृष्ण, मिथुन और मनोज मित्तल नाम के पांच आरोपी फिलहाल चार दिन की पुलिस हिरासत में हैं। उन पर गैर इरादतन हत्या, लापरवाही से मौत और सार्वजनिक रास्ते पर तेज गति से गाड़ी चलाने सहित विभिन्न अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया है।

दो अन्य गवाह भी हुए गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने आशुतोष और अंकुश खन्ना नाम के दो और लोगों को यह कहते हुए गिरफ्तार किया है कि वे पांचों आरोपियों को बचाने में शामिल थे। अंकुश ने सुल्तानपुरी पुलिस स्टेशन में सरेंडर कर दिया था। जब आशुतोष को उत्तर पश्चिमी दिल्ली के बुद्ध विहार से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार आशुतोष ने ही 31 दिसंबर को अमित, कृष्ण, मिथुन और मनोज को कार दी थी।

क्या हुआ था 31 दिसंबर की रात
पीड़िता अंजलि कुमारी अपनी सहेली निधि के साथ 1 जनवरी को नए साल की पूर्व संध्या (31 दिसंबर की रात) पार्टी कर स्कूटी से अपने घर जा रही थी, तभी एक मारुति सुजुकी बलेनो ने उन्हें टक्कर मार दी। निधि एक तरफ गिर गई, जबकि अंजलि का शरीर कार के नीचे फंस गया और वह कम से कम 14 किलोमीटर तक घसीटती रही। जिसके बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस को 1 जनवरी की सुबह लगभग 4.30 बजे के आसपास अंजलि का शव क्षत-विक्षत हालात में मिला। उसके शरीर पर एक भी कपड़े नहीं थे।

घटना के वक्त में 4 या 5 लोग थे कार में?
घटना के बाद एक तारीख की सुबह पुलिस ने पांचों आरोपियों मनोज मित्तल, मिथुन, कृष्ण, अमित खन्ना व दीपक खन्ना को गिरफ्तार कर लिया था। जिसके तीन दिन बाद पता चला कि घटना के दौरान बलेनो कार में सिर्फ चार लोग मौजूद थे, पांचवा शख्स दीपक खन्ना कार में नहीं था। अब पुलिस के सामने ये चुनौती है कि वह यह साबित करे कि घटना के दौरान कार में सच में चार ही आरोपित थे या पांच। इसके लिए पुलिस डीएनए जांच कराने का फैसला किया है।












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