पंजाब के किसानों की सफल कहानी: खेती के साथ सहायक व्यवसाय, कम जमीन में ज्यादा मुनाफा

पंजाब के किसान सदियों से गेहूं और धान की खेती करते आ रहे हैं, लेकिन कम होती जमीन और बढ़ती लागत ने उनकी आय को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में, आजीविका के नए साधन तलाशना जरूरी हो गया है।

इस चुनौती का सामना करते हुए, पंजाब के किसानों ने खेती के साथ-साथ सहायक व्यवसायों को अपनाकर अपनी आय को दोगुना करने का रास्ता खोज निकाला। पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, सुअर पालन, बकरी पालन जैसे व्यवसाय कम जगह में भी किए जा सकते हैं और इनसे अच्छी कमाई होती है। डेयरी फार्म की तुलना में, मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन, सुअर पालन, बकरी पालन में लागत कम आती है और जगह भी कम लगती है।

Success story of farmers of Punjab allied business along with farming more profit in less land

लुधियाना के कोटला गांव के किसान अमरजीत सिंह ने फार्मवे एफपीओ नामक एक किसान उत्पादक संगठन बनाया है। यह एफपीओ सूअर पालन और मुर्गी पालन दोनों में सफलतापूर्वक काम कर रहा है। जालंधर के भोगपुर गांव में भोगपुर किसान उत्पादक संगठन नामक एफपीओ जैविक गुड़, शुद्ध हल्दी और अन्य उत्पाद बनाता है।

केंद्र सरकार किसानों को किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने और सहायक व्यवसाय अपनाने के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान करती है। पंजाब के किसानों की सफल कहानियां बताती हैं कि खेती के साथ सहायक व्यवसाय अपनाकर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। सरकार की मदद से और नई तकनीकों का इस्तेमाल करके, पंजाब का किसान समुदाय न केवल अपनी आय बढ़ा रहा है, बल्कि भारत की समृद्धि की कहानी में नए अध्याय भी जोड़ रहा है।

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