क्या वाकई देश में गुजर चुका है कोरोना वायरस का पीक, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

भारत में कोरोना के मामलों में अचानक से हुई तीव्र वृद्धि के कुछ सप्ताह बाद भारत में कोरोना के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले एक सप्ताह में कोरोना के मामलों की संख्या में लगातार गिरावट देखने को मिली है।

नई दिल्ली, 17 मई। भारत में कोरोना के मामलों में अचानक से हुई तीव्र वृद्धि के कुछ सप्ताह बाद भारत में कोरोना के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले एक सप्ताह में कोरोना के मामलों की संख्या में लगातार गिरावट देखने को मिली है। सप्ताह भर का औसत निकालें तो 1 से 8 मई के बीच भारत में कोरोना के 3.92 लाख मामले दर्ज किये थे जबकि अगले सप्ताल 15 मई तक भारत में कोरोना के 3.41 लाख मामले दर्ज हुए। इसके अलावा टेस्ट पॉजिटिविटी रेट (टीपीआर) में भी कमी आई है। इस दौरान टीपीआर 22.6% से घटकर 19% रह गया।

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आंकड़े बताते हैं कि भारत में कोरोना वायरस का अब पतन हो रहा है। यह दावा टीपीआर, औसत दैनिक मामलों और औसत दैनिक टेस्ट के आंकड़ों के आधार पर किया जा रहा है, जो यह दिखाते हैं कि कोरोना के टेस्ट की संख्या में वृद्धि के बाद भी केसों में गिरावट दर्ज हुई। यहां तक की कोरोना वायरस के परीक्षणों की संख्या प्रतिदिन लगभग 18 लाख रही, जबकि 8 मई के बाद टीपीआर कम हो गया। इस डेटा को और बारीकी से जांचने पर पता चलता है कि सभी राज्यों में कोरोना की स्थित एक समान नहीं है। कुछ राज्य कोरोना के दैनिक मामलों के वक्र को मोड़ने में कामयाब रहे, जबकि अन्य राज्यों ने कोरोना टेस्ट की संख्या में कमी करके कोरोना का पीक दिखाने की कोशिश की।

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टेस्टों की संख्या में कमी कर के पीक हासिल करने की कोशिश
डेटा के अनुसार लगभग 11 प्रमुख राज्यों ने हाल ही में परीक्षण से स्तर को कम किया है। इन 11 में से 4 राज्यों में पॉजिटिविटी रेट में वृद्धि दर्ज हुई है। कोरोना के टेस्ट में कमी करके पीक हासिल करने का सीधा मतलब यह होगा कि हम कई संक्रमित लोगों की पहचान करने से चूक रहे हैं।

आंध्र प्रदेश, असम, कर्नाटक और राजस्थान जैसे राज्यों कोरोना टेस्ट की संख्या घटाने के बावजूद पॉजिटिविटी रेट में वृद्धि दर्ज की गई है। टेस्टों की संख्या में कमी लाकर यह दिखाना कि वहां कोरोना के मामलों में कमी आई है सही तरीका नहीं है।

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, गोवा और दिल्ली में टेस्टिंग रेट के साथ-साथ पॉजिटिविटी रेट दोनों में गिरावट आ रही है। ये राज्य ऊपर दिए गए राज्यों के समूह से बेहतर काम कर रहे हैं। इन राज्यों ने अपने यहां कोरोना के केसों की संख्या को कम दिखाने के लिए टेस्ट की संख्या में कमी नहीं की है।

ये राज्य कर रहे बेहतर काम
बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य हैं जहां परीक्षण के स्तर में वृद्धि के बावजूद सकारात्मकता दर गिर रही है, यह दर्शाता है कि ये राज्य सर्वोत्कृष्ट परीक्षण रणनीति का पालन कर रहे हैं। हालांकि उत्तर भारत के राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसी रिपोर्ट हैं कि यहां परीक्षण न्यूनतम रहा है, जो मामलों के वास्तविक प्रसार पर सवाल उठाता है।

इनके अलावा पंजाब, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य अपने परीक्षण की दर बढ़ा रहे हैं, लेकिन इन राज्यों में टीपीआर रेट में भी वृद्धि हुई जो यह सुझाव देता है कि इन राज्यों को संक्रमण को पकड़ने के लिए टेस्ट की संख्या में और वृद्धि करने की जरूरत है।

मौतों की संख्या में नहीं आ रही कमी
आंकड़े बताते हैं कि भारत में कोरोना के मामलों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है लेकिन मौतों का आंकड़ा कम नहीं हो रहा है। पिछले एक सप्ताह से भारत में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या 3,900 से ऊपर बनी हुई है। मौतों की संख्या से कोरोना की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। यदि कोरोना के मामलों में कमी स्वभाविक है तो मृत्यु दर में भी बाद में कमी आएगी। विभिन्न रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि कई राज्यों में मौतों की संख्या वास्तविक संख्या से कम बताई जा रही है।

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