कोरोना संक्रमित मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का दिखा सीमित प्रभाव, स्टडी में आया सामने

नई दिल्ली, मई 17। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के प्रकोप के बीच बढ़ते संक्रमण और मौत के आंकड़ों ने फिर से 'प्लाज्मा थेरेपी' को चर्चाओं में ला दिया था। पिछले साल दिल्ली सरकार ने कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए 'प्लाज्मा थेरेपी' का बहुत अधिक इस्तेमाल किया था। इस बार भी सोशल मीडिया पर कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए प्लाज्मा थेरेपी की बहुत अधिक मांग सोशल मीडिया पर देखी गई, लेकिन अब एक स्टडी में पता चला है कि ये थेरेपी कोरोना के गंभीर मरीजों या फिर मौत के खतरे को कम करने में सीमित असर दिखाती है।

Plasma

39 अस्पतालों में आयोजित की गई स्टडी

आपको बता दें कि इस स्टडी को 39 प्राइवेटअस्पतालों में आयोजित किया गया और इसमें 464 लोगों पर रिसर्च की गई। इन अस्पतालों में पिछले साल अप्रैल से जुलाई के बीच भर्ती हुए 464 मरीजों को शामिल किया गया। इस स्टडी की रिपोर्ट को तैयार करने में करीब 100 एक्सपर्ट की टीम इस काम में लगी, जिसमें पांच तिरुपति स्थित श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसवीआईएमएस) से थे, जिनमें न्यूरोलॉजी के निदेशक और प्रोफेसर बी. वेंगम्मा, अल्लादी मोहन और के. चंद्रशेखर शामिल थे।

रिसर्च में आए चौंकाने वाले नतीजे

इस रिसर्च के दौरान 253 मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया गया, जबकि 229 मरीजों को साधारण देखभाल में रखा गया। पहली श्रेणी के मरीजों को 200 ml प्लाज्मा की दो डोज दी गई। इसके बाद उनके सैंपल पर 28 दिन तक स्टडी की गई, जिसमें सामने आया कि पहली श्रेणी के 44 मरीजों में और दूसरी श्रेणी के 41 मरीजों में इस वायरस को बढ़ते हुए देखा गया। पिछले साल अक्टूबर के महीने में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए इस स्टडी में पता चला की जिन मरीजों को प्लाज्मा दिया गया उन मरीजों में वायरस की गंभीरता और मौत का खतरा कम नहीं हुआ। हालांकि सांस की तकलीफ और थकान में जरूर आराम मिला।

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