लोकतंत्र रक्षक सेनानी का मुलायम से कनेक्शन? जिनके लिए इमरजेंसी पर आक्रामक BJP को अखिलेश ने दी चुनौती
Emergency Resolution: कांग्रेस पार्टी और उसकी सहयोगी लोकसभा चुनावों के समय से ही भारतीय जनता पार्टी सरकार को संविधान की रक्षा के नाम पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं। नई सरकार बनने के बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं है। लेकिन, उसी दौरान 25 जून, 2024 को आपातकाल के काले अध्याय की 49वीं बरसी आ गई और बीजेपी को मौका मिल गया।
26 जून यानी बुधवार को लोकसभा के नव-निर्वाचित स्पीकर ओम बिरला ने सदन में 1975 में इंदिरा सरकार की ओर से देश पर थोपे गए आपातकाल के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश कर दिया।

'लोकतंत्र रक्षक सेनानी' के भत्ते पर अखिलेश ने भाजपा को ललकारा
इंडिया ब्लॉक बीजेपी के इस दांव में उलझ गया और बीजेपी के सहयोगियों के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, डीएमके और टीएमसी जैसी कांग्रेस की सहयोगियों ने भी इसका समर्थन किया।
लेकिन, बाद में सपा चीफ अखिलेश यादव ने बीजेपी पर जमकर भड़ास निकाली और कहा कि अगर उसे आपातकाल की इतनी ही चिंता है तो वह 'लोकतंत्र रक्षक सेनानी' का भत्ता बढ़ाए।
कौन हैं 'लोकतंत्र रक्षक सेनानी'?
'लोकतंत्र रक्षक सेनानी' वे हैं, जिन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान 1975 से लेकर 1977 के बीच मेंटनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (MISA) के तहत जेलों में कैद किया गया था। इस समय 'लोकतंत्र रक्षक सेनानी' को 20,000 रुपए मासिक भत्ता मिलता है।
अखिलेश बोले, 'बीजेपी ने आज जो किया है, वह तो महज दिखावा है। ये उनमें से नहीं थे जो तब (इमरजेंसी में)जेल गए थे। समाजवादी पार्टी नेताओं के साथ सभी नेताओं ने वह काल देखा है। लेकिन हम कबतक पीछे की ओर देखते रहेंगे.....'
बीजेपी लोकतंत्र सेनानी को 1 लाख रुपए का भत्ता कब देगी?
उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि 'बीजेपी ने लोकतंत्र रक्षक सेनानी को मिली सुविधाएं कम कर दी हैं....अगर बीजेपी इतनी हितैषी है तो पार्टी ने उनका भत्ता दोगुना क्यों नहीं कर दिया? क्या बीजेपी लोकतंत्र रक्षक सेनानी का भत्ता और सुविधाएं बढ़ाएगी?....बीजेपी को बताना चाहिए कि लोकतंत्र सेनानी को 1 लाख रुपए का भत्ता कब देगी?'
लोकतंत्र रक्षक सेनानी का मुलायम से क्या है कनेक्शन?
आपातकाल के दौरान अखिलेश यादव के पिता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह भी 19 महीने जेल में बंद रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुलायम जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने आपातकाल के दौरान प्रदेश में गिरफ्तार किए गए और जेलों में बंद रहे लोगों को सम्मान के तौर पर मासिक 500 रुपए देने की घोषणा की थी।
यूपी में तब ऐसे लोगों की संख्या करीब 1,200 थी और उन्होंने इनके साथ स्वतंत्रता सेनानियों की तरह का बर्ताव करने को कहा था और साथ ही आधिकारिक संवादों में इन्हें 'लोकतंत्र सेनानी' के तौर पर जिक्र करने को कहा था। उन्होंने प्रदेश सरकार की बसों में 'लोकतंत्र सेनानी' को एक अटेंडेंट के साथ फ्री पास पर सफर करने की छूट भी दी थी।
दरअसल, यूपी में समाजवादी पार्टी, बिहार में जेडीयू और आरजेडी, ओडिशा में बीजेडी और कर्नाटक में जेडीएस जैसी पार्टियां किसी न किसी रूप में आपातकाल के दरान कांग्रेस सरकार की विरोध से ही पैदा हुई पार्टियां हैं। इस विरोध का केंद्र बिहार और यूपी ही था और मुलायम से लेकर लालू यादव, नीतीश कुमार तक उसी आंदोलन से निकले हुए नेता हैं।












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