भारत RCEP में शामिल नहीं होगा, पीएम ने लिया बाहर रहने का फैसला: सू्त्र

नई दिल्ली। भारत ने आरसीईपी ज्वाइन नहीं करने का फैसला किया है। पीएम ने भारत की प्रमुख चिंताओं को लेकर समझौता नहीं करने का फैसला किया है। भारत के हितों से किसी भी तरह के समझौता नहीं होगा। बता दें कि आरसीईपी एक ट्रेड अग्रीमेंट है जो कि सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार में कई सहूलियत देगा। इसके तहत निर्यात पर लगने वाला टैक्स नहीं देना पड़ेगा या तो बहुत कम देना होगा।

भारत आरसीईपी समझौते में शामिल नहीं होगा

भारत आरसीईपी समझौते में शामिल नहीं होगा

सरकारी सूत्रों ने कहा कि,वे दिन गए तब व्यापार के मुद्दों पर वैश्विक शक्तियों द्वारा भारत पर दबाव डाला जाता था। इस बार भारत ने फ्रंट फुट पर खेला और व्यापार घाटे पर भारत की चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय सेवाओं और निवेशों के लिए वैश्विक बाजार खोलने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। भारत के इस रुख से गरीबों के हितों की रक्षा तो होगी ही साथ ही इससे सर्विस सेक्टर को भी फायदा पहुंचेगा।

 आरसीईपी समझौता अपने मूल उद्देश्य को नहीं दर्शाता है

आरसीईपी समझौता अपने मूल उद्देश्य को नहीं दर्शाता है

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री का रुख इस मामले पर स्पष्ट है। समझौते के अहम मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया है और भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। आरसीईपी समझौता अपने मूल उद्देश्य को नहीं दर्शाता है और इसके नतीजे संतुलित नहीं होंगे। सूत्रों ने बताया कि भारत ने आयात की अधिकता की सुरक्षा के लिए अपर्याप्त व्यवस्था, चीन के साथ अपर्याप्त अंतर, नियमों में बदलाव की आशंका, बाजार की अनुपलब्धता जैसे विषयों को लेकर चिंता जाहिर की थी। विदेश मंत्रालय के सचिव विजय ठाकुर सिंह ने कहा था कि भारतीय प्रतिनिधि आरसीईपी व्यापार सौदे से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को हल करने में जुटे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह बेहतर और पारदर्शी है। कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जो अभी भी स्पष्ट नही हैं। यह मुद्दे हमारी अर्थव्यवस्था और हमारे लोगों की आजीविका के लिए बेहद जरूरी हैं।

पीएम मोदी ने कही ये अहम बात

बैंकॉक में आरसीईपी समिट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आरसीईपी की कल्पना करने से हजारों साल पहले भारतीय व्यापारियों, उद्यमियों और आम लोगों ने इस क्षेत्र के साथ संपर्क स्थापित किया था। सदियों से इन संपर्कों और संबंधों ने हमारी साझा समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।आरसीईपी 10 आसियान देशों, जैसे ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, लाओस और वियतनाम और उनके छह एफटीए साझेदार चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच एक प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय थाईलैंड यात्रा पर हैं। वह आज बैंकॉक में एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

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