रंग लाया 700 किसानों का बलिदान, उम्मीद है मोदी सरकार को कुछ सबक मिलेगा- सोनिया गांधी

सोनिया गांधी ने कहा है कि सत्ता में बैठे लोगों ने किसानों-मजदूरों के खिलाफ जो साजिश रची, उसकी आज हार हुई है।

नई दिल्ली, 19 नवंबर: पिछले एक साल से भी ज्यादा वक्त से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच शुक्रवार को पीएम मोदी ने केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन कानूनों का मकसद देश के छोटे किसानों को सशक्त बनाना था, लेकिन शायद सरकार अपनी बात किसानों को समझाने में नाकाम रही। पीएम मोदी के इस फैसले के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। सोनिया गांधी ने कहा है कि आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई है।

'किसानों-मजदूरों के खिलाफ रची गई साजिश की हार'

'किसानों-मजदूरों के खिलाफ रची गई साजिश की हार'

कृषि कानूनों की वापसी के फैसले पर सोनिया गांधी ने अपना बयान जारी करते हुए कहा, 'न्याय के लिए किए गए इस संघर्ष में जिन 700 से ज्यादा किसान परिवारों के सदस्यों ने अपने प्राणों की आहुति दी, आज उनका बलिदान रंग लाया है। आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई है। सत्ता में बैठे जिन लोगों ने किसानों और मजदूरों के खिलाफ साजिश रची, आज उनकी हार हुई है। आज तानाशाही करने वाले लोगों के अहंकार की भी हार हुई है।'

'मोदी सरकार को भविष्य के लिए सबक मिलेगा'

'मोदी सरकार को भविष्य के लिए सबक मिलेगा'

अपने बयान में सोनिया गांधी ने आगे कहा, 'आज उस साजिश को हराया गया है, जो लोगों की रोजी-रोटी और खेती किसानी पर हमला करना चाहती थी। आज देश के अन्नदाता की जीत हुई है। एक लोकतंत्र के अंदर कोई भी फैसला विपक्ष के साथ विचार-विमर्श और हर उस इंसान के साथ बातचीत करके लिया जाना चाहिए, जो उस फैसले से कहीं ना कहीं जुड़ा है। मुझे उम्मीद है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को इससे भविष्य के लिए कोई सबक मिलेगा।'

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    'जब तक संसद में रद्द नहीं होंगे कानून, आंदोलन जारी रहेगा'

    'जब तक संसद में रद्द नहीं होंगे कानून, आंदोलन जारी रहेगा'

    वहीं, कृषि कानूनों के रद्द करने के फैसले के बाद भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन अभी जारी रहेगा। राकेश टिकैत ने कहा, 'अभी कृषि कानून रद्द कहां हुए हैं, रद्द किए जाने के पेपर कहां हैं। जब तक संसद के अंदर कृषि कानून रद्द नहीं होते और एमएसपी की गारंटी सहित किसानों के बाकी मुद्दों का हल नहीं निकलता, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। कानून रद्द होंगे तो हम भी अपने घरों को लौट जाएंगे।'

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