नेहरू के निजी पत्र, सार्वजिनक नहीं करेंगे सोनिया गांधी
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के तमाम पत्र अभी भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के कब्जे में हैं। उन्हें वह देश के साथ साझा करने के लिए तैयार नहीं हैं। जानकारों ने बताया कि पहले उम्मीद थी कि सोनिया नेहरू की 125 वीं जयंती के अवसर पर इन पत्रों को नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट और लाइब्रेयरी को सौंप देंगी।

सोनिया ने रखा अपने पास
जानकारों ने बताया कि सोनिया गांधी ने इन अहम पत्रों को अपने पास ही रखने का फैसला किया। उनके इस कदम से उन तमाम लोगों को निराश हुई है जो नेहरू पर गंभीरता से अध्ययन कर रहे हैं। जर्मन रेडियो की हिन्दी सेवा के पूर्व संपादक पुष्परंजन कहते हैं कि नेहरू देश की शख्सियत थे। पर सोनिया गांधी ने उन्हें अपना परिवार का सदस्य ही समझा है। एक हदतक यह बात सही हो सकती है, पर नेहरू पर पूरे देश का अधिकार है।
कब लिखे गए पत्र
ये पत्र 1947 से लेकर 1964 तक लिखे गए। जानकारों का कहना है कि इन पत्रों से पता सकता है कि उनके अपने परिवार के सदस्यों और दूसरे लोगों के साथ किस तरह के संबंध थे। एक बात और इन पत्रों को पढ़ना किसी के लिए लाभदायक हो सकता है। क्योंकि नेहरू के लिखे पत्रों से इंसान बेहतर अंग्रेजी लिखना सीख सकता है और उसे उस दौर के भारत की तस्वीर देखने को मिल सकती है। जानकार कहते हैं कि देश के चोटी के चिंतकों को सोनिया गांधी से अपील करनी चहिए वे नेहरू के निजी पत्रों को सार्वजनिक करें।












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