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एक्सक्लूसिवः दो सप्ताह पहले लड़ाकू विमान ने किया निर्भय मिसाइल का पीछा

बेंगलुरु। दो सप्ताह पहले जब निर्भय मिसाइल लॉन्च हुई, तब एक ट्वीट वायरल हुआ। वो था "जैगुआर फाइटर प्लेन ने किया निर्भया मिसाइल का पीछा"। पढ़ने और सुनने में यह अचंभ‍ित करने वाली बात लगी। बहुतों ने इस पर यकीन भी नहीं किया। लेकिन वास्तव में यह बात पूरी तरह सच थी। जिस दिन निर्भया आसमान में दागी गई, उस दिन उसका पीछा भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान जैगुआर ने किया। इस पूरी प्लानिंग को अंजाम दिया डीआरडीओ की टीम ने। उस वक्त क्या हुआ और पायलट कैसा महसूस कर रहा था, आज आप वनइंडिया की इस एक्सक्लूसिव खबर में पढ़ेंगे।

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मिसाइल लांच करने पर फाइटर प्लेन में बैठा पायलट हवा में रोमांच के साथ ही खतरे आपका पीछा कर रहे थे। हवा को चीरती- सर्राती हुई मिसाइल अपने टारगेट पर पहुंचने के लिए रफ्तार बांधे हुई थी है और उससे कुछ दूरी पर ही फाइटर पायलट उससे तालमेल बिठा रहा था। इस रोमांचक थ्र‍िलर को अंजाम देने में भारतीय नौसेना ने भी बड़ी भूमिका निभाई।

यह वो समय होता है जब हवा में अपना हौसला बरकरार रखते हुए फाइटर प्लेन में बैठे पायलट को अपनी सूझबूझ से ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनावाना होता है। एक थोड़ी सी भी चूक मिसाइल दिशा भटका सकती है और फाइटर पायलट की जान पर भी आ सकती है।

एन वक्त पर उठाना पड़ा था जोखिम

देश के सामने इस बार निर्भया मिसाइल को सफलता पूर्वक लांच करने की एक बड़ी चुनौति थी। इससे पहले निर्भया मिसाइल को लांचिंग में किए गए प्रयास सफल नहीं हो पाए थे। इस बार वैज्ञानिकों और फाइटर पायलटों इतना दबाव और मन में आशंका होने के बावजूद इस प्रयोग को सफल अंजाम तक पहुंचाना था। लेकिन एन वक्त पर सारा किया धारे पर पानी सा फिर गया था।

निर्भया मिसाइल को चैस करने के लिए फाइटर प्लेन सुखोई को तैयार किया गया था। लेकिन महज कुछ दिन पहले सुखोई में तकनीकी समस्या का पता चला। जिसके बाद कोई भी चारा वैज्ञानिकों को नहीं सूझ रहा था। लेकिन इस जौखिम उठाते हुए जगुआर फाइटर प्लेन को चैसिंग के लिए भेजा गया।

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इतनी बड़ी होती है चुनौति

तेजस के टेस्ट पायलट के प्राप्त जानकारी के मुताबिक किसी मिसाइल को चैस करना हर पायलट के लिए उस समय की सबसे बड़ी चुनौति होती है। क्योंकि चैस करते समय एक निर्धारित दूर पर ही रहना पड़ता है। स्पीड भी तय होती है। इसके अलावा न ही आप जल्दी पहुंच सकते हैं न ही आप देरी कर सकते हैं। यानी सभी कुछ तय होता है। इस सीमा लांघने पर बड़ा अंजाम भुगतना पड़ता है।

देश के यह हैं दमदार फाइटर प्लेन

जगुआर, मिराज, सुखोई, तेजस ऐसे फाइटर पायलट हैं जिनसे मिसाइल लांचिंग के समय पर चैसिंग की जाती है। इन फाइटर प्लेन में बैठा पायलट अपनी प्रतिभा से एयरोनोटिकल डवलपमेंट स्टेबलिशमेंट के डायरेक्टर (डीआरडीओ) पी.श्री कुमार मानते हैं कि मिसाइल को सफलतापूर्वक लांच कराने में फाइटर प्लेन और मिसाइल और अन्य सभी कार्यों में बनाया गया कॉरडिनेशन सबसे अच्छा प्रयास था।

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आखिरकार सफल रहा रही निर्भया

आखिरकार निर्भया मिसाइल का सफल परीक्षण के रूप में नतीजा सामने आया। जिसके बाद कई वैज्ञानिकों का विश्वास जगुआर फाइटर पायलट और प्लेन पर अधिक बढ़ गया। पी.श्री कुमार का मानना है कि जगुआर भी बराबर की क्षमता रखता वाला फाइटर प्लेन है। जितनी क्षमता अन्य फाइटर प्लेन में है। गौरतलब है कि टारगेट सेट करने के अनुसार जगुआर ने अंबाला से कलाईकुंदा उड़ान भर टारगेट पर नजर बनाए रखी।

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