Singing sensation:रानू मंडल के दिन फिरे, बेटी को तब आई मां की याद!

बंगलुरू। एक वायरल वीडियो से सिंगिंग सेनशेसन बनीं रानू मंडल आज किसी परिचय की मोहताज नहीं रह गई हैं। बॉलीवुड से मशहूर म्युजिक डायरेक्टर हिमेश रेशमिया की अगली फिल्म हैप्पी हार्डी एंड हीर के लिए प्लेबैक सिंगिंग कर रही रानू मंडल रोज एक नई इबारत लिख रही हैं और उन्हें अब भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लोग पहचाते हैं, लेकिन रानू मंडल जब कोलकाता के राणाघाट स्टेशन पर आने-जाने वाले मुसाफिरों के लिए गाना गाकर अपना पेट पाल रहीं थी तब उनके रिश्तेदार और उनकी बेटी कहां थी, यह सवाल हर किसी के मन में कौंध रहा है।

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यह सवाल मौजू भी है, क्योंकि पति बाबूल मंडल की मौत के बाद मुंबई से पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में पहुंची रानू मंडल को किसी का साथ नही मिला, इसमें बेटी भी शामिल है। जी हां, वही बेटी जो मां रानू मंडल के दिन फिरने पर दौड़ती हुई मां से चिपक गई थी। मीडिया के विभिन्न माध्यमों में मां रानू मंडल के साथ चिपकी दिखी उसकी बेटी पिछले 10 वर्षों से अपनी मां से संपर्क में नहीं थी और जैसे मां सोशल मीडिया पर छा गईं, बेटी लौट आई।

कोलकाता के राणाघाट स्टेशन पर सुर साम्रागी लता मंगेसकर द्वारा गाए मशहूर गीत 'एक प्यार का नगमा है' गुनगुनाकर मशहूर हुईं रानू मंडल की जिंदगी हिमेश रेशमिया की फिल्म हैप्पी हार्डी एंड हीर के गाने 'तेरी-मेरी, मेरी तेरी कहानी' गुनगुनाने के बाद पूरी तरह से बदल गई है। ऐसा लगता है तेरी-मेरी और मेरी-तेरी कहानी के लिरिक्स रानू मंडल पर भी सटीक बैठते हैं।

रानू मंडल की कहानी में आए खूबसूरत मोड़ में ईश्वर प्रदत्त आवाज की भूमिका है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि रानू मंडल कोलकाता के राणाघाट स्टेशन पर ही गाना गुनगुनाना शुरू नही किया था बल्कि रानू मंडल बचपन से गाना गुनगुनाने का शौक था, जिसे जवानी तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने बतौर प्रोफेशन भी चुन लिया था। जी हां, रानू मंडल कोलकाता के एक क्लब में बतौर सिंगर परफॉर्म करती थी, लेकिन तब समाज के तानों के चलते रानू को क्लब में सिंगिंग की नौकरी छोड़नी पड़ गई थी।

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रानू मंडल की दिलकश और जादुई आवाज के दीवानों की कमी भी कम नहीं थी, लोग उन्हें रानू बॉबी के नाम से पुकारते थे। लेकिन शादी के बाद रानू मंडल का म्युजिक और गायकी से साथ छूट गया और जब पति की मौत हो गई तो रानू को मुंबई छोड़कर पश्चिम बंगाल वापस आ गईं।

कहते हैं इस दौरान मुंबई में रह रही उनकी बेटी ने भी मां का सपोर्ट नहीं किया और उन्हें कोलकाता के राणाघाट स्टेशन के पास अपना पेट पालने के लिए बैठना पड़ा, जहां रानू रोज गाकर लोगों का मनोरंजन करती थीं और बदले में लोग उन्हें कभी पैसा और खाने की चीजें दे दिया करते थे।

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रिपोर्ट पर भरोसा करें तो राणाघाट स्टेशन पर मां रानू मंडल किस तरह जीवन गुजार रही है, लेकिन बेटी ने पिछले 10 वर्ष में एक बार भी अपनी मां का हाल चाल पूछने की जहमत नहीं की। रानू कहती है कि उनकी बेटी को उनकी दशा देखकर शर्मिंदगी होती थी इसलिए उसकी बेटी ने उससे रास्ते तोड़ लिए थे और एक दशक तक उसने अपनी से बात तक नहीं की थी। हालांकि रानू को इसका गिला नहीं है कि तब बेटी क्यों नहीं और अब बेटी क्यों आ गई। रानू बस अपनी नई जिंदगी बेहद खुश हैं और खुद और बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं।

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रानू कहती हैं कि उन्हें गाने के अलावा दूसरा काम आता हीं नहीं, क्योंकि उनकी पूरी दिलचस्पी संगीत और गायिकी में रही। इसलिए उन्होंने स्टेशन के बाहर बैठकर गाना गुनगुनाना शुरू किया, जहां यतीन्द्र चक्रव्रती ने उन्हें मोबाइल में गाते हुए शूट कर लिया और वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल दिया और रानू मंडल रातों-रात स्टार बन गईं। 21 जुलाई को वायरल हुआ रानू मंडल का वीडियो अबतक 4 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है। रानू को खुद भी विश्वास नहीं हो रहा है कि लोगों ने उनकी गायिकी का इतना पसंद किया है।

हालांकि यह पहला अवसर नहीं था जब किसी ने रानू मंडल की गायिकी से प्रभावित होकर उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया हो। इससे पहले भी तपन दास नामक एक युवक ने रानू मंडल का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था, लेकिन तब रानू मंडल की आवाज पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। समय बदला तो वीडियो में वायरल हो गया और आज रानू मंडल न केवल बॉलीवुड की प्लेबैक सिंगर बन चुकी हैं, बल्कि उन्हें देश-विदेश और विभिन्न क्लब, बैंड्स के लिए परफॉर्म करने के लिए आमंत्रण मिल रहे हैं।

रानू मंडल की जिंदगी फर्श पर अर्श पर आ गई है, लेकिन सवाल वहीं छूटा हुआ है कि रानू मंडल की बेटी ने अपनी बेबस मां के साथ तब क्यों नहीं थी, जो अब मां के दिन फिरने पर उनके पास लौट आई है। हालांकि यह सवाल सिर्फ रानू मंडल की बेटी के लिए नहीं है, बल्कि उस समाज से है जो अपनों को सिर्फ इसलिए छोड़ देता है कि अब वो महज बोझ हैं। रिश्तों की याद तभी आती है जब उसके साथ कुछ अर्थ अथवा शोहरत जुड़ जाती है।

खैर, सेलीब्रेटी बन चुकी रानू मंडल के सपने, जो उन्होंने अपने बचपन और जवानी में देखे थे, वो अब पूरे हो चुके हैं और रानू मंडल अब अपने सपने को जीने के लिए तैयार हैं। रानू कहती हैं कि यह उनका दूसरा जन्म है और दूसरे जन्म में अपने सपने को पूरा करने के लिए वो खूब मेहनत करेंगी। रानू मंडल जैसी बहुत विभूतियां हमारे आसपास मौजूद है्, जो कभी परिवार, कभी समाज के नाम पर कुर्बान हो जाती है, बस देर है तो सिर्फ उनके चमकने की, क्योंकि जौहरी तो मिल ही जाते हैं।

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