Simone Tata: कौन थीं सिमोन टाटा? भारत घुमने आई स्विस लेडी ने बदल डाला कॉस्मेटिक इंडस्ट्री का चेहरा
Who was Simone Tata: स्विट्ज़रलैंड से भारत आई एक साधारण पर्यटक, जिसने न सिर्फ अपने जीवन की दिशा बदली बल्कि पूरे देश के कॉस्मेटिक और रिटेल उद्योग का चेहरा भी बदल दिया। भारतीय महिलाओं के लिए घरेलू मेकअप ब्रांड लैक्मे को पहचान दिलाने से लेकर वेस्टसाइड जैसे आधुनिक रिटेल स्टोर की नींव रखने तक, सिमोन टाटा का सफर प्रेरणा, संघर्ष और दूरदर्शिता से भरा रहा। भारत में कॉस्मेटिक उद्योग की पहचान बदलने वाली और वेस्टसाइड जैसी लोकप्रिय रिटेल चेन की नींव रखने वाली सिमोन टाटा का निधन आज निधन हो गया।
वे 95 वर्ष की थीं। लंबे समय से वे पार्किंसंस जैसी समस्याओं से जूझ रही थीं और हाल के महीनों में उनका इलाज दुबई और मुंबई दोनों जगह हुआ था। 95 वर्ष की उम्र में जिनेवा में उनका निधन एक ऐसे युग का अंत है, जिसने भारतीय उपभोक्ता संस्कृति को नई पहचान दी। उनके विज़न ने उस दौर में भारतीय महिलाओं, भारतीय बाज़ार और भारतीय ब्रांड्स को वह स्थान दिलाया जिसकी कल्पना भी कठिन थी। उनके जाने से टाटा समूह और भारत के बिज़नेस जगत में एक महत्वपूर्ण अध्याय खत्म हो गया है।

एक पर्यटक से भारत की प्रमुख उद्योगपति बनने का सफर
सिमोन टाटा का जन्म मार्च 1930 में जिनेवा में हुआ था। वे 1953 में पहली बार घुमने के उद्देश्य से भारत आई थीं। इसी दौरान उनकी मुलाक़ात नेवल टाटा से हुई। दोनों ने 1955 में शादी की और सिमोन भारत की नागरिकता के साथ मुंबई में बस गईं। वे नेवल टाटा की दूसरी पत्नी थीं। उनसे उन्हें एक बेटा नोएल टाटा हुआ, जो आज टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं। वे रतन टाटा और जिम्मी टाटा की सौतेली मां भी थीं।
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टाटा समूह के साथ करियर की शुरुआत
लैक्मे बोर्ड में प्रवेश
सिमोन टाटा का टाटा समूह के साथ औपचारिक जुड़ाव 1961 में तब शुरू हुआ जब वे लैक्मे के बोर्ड में शामिल हुईं। उस समय लैक्मे, टाटा ऑयल मिल्स कंपनी (TOMCO) का छोटा-सा हिस्सा था, जो साबुन और पर्सनल केयर उत्पादों के लिए जाना जाता था। भारत में उस समय विदेशी ब्रांडों का दबदबा था, लेकिन सिमोन टाटा ने महसूस किया कि भारतीय महिलाओं के लिए भारत की अपनी कॉस्मेटिक ब्रांड की कमी है। उन्होंने लैक्मे को सिर्फ एक छोटे ब्रांड से निकालकर देश की सबसे भरोसेमंद कॉस्मेटिक कंपनी बना दिया। इसी कारण उन्हें "कॉस्मेटिक ज़ारिना ऑफ इंडिया" भी कहा जाता है।
लैक्मे की चेयरपर्सन बनीं
उनकी नेतृत्व क्षमता के कारण 1982 में उन्हें कंपनी का चेयरपर्सन बनाया गया। उनके कार्यकाल में कंपनी की पहचान और बाज़ार दोनों तेजी से बढ़े। 1990 के बाद जब भारतीय बाज़ार खोले गए, उन्होंने नए बदलावों को समझा और रणनीतिक फैसला लेते हुए 1996 में लैक्मे और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बीच 50:50 का जॉइंट वेंचर बनाया। कुछ वर्षों बाद 1998 में लैक्मे ने अपने ब्रांड्स को HUL को बेच दिया और जॉइंट वेंचर से बाहर निकल गई।
वेस्टसाइड जैसे रिटेल स्टोर की नींव
लैक्मे के कारोबार से मिले फंड को उन्होंने एकदम नई दिशा दी-फैशन और रिटेल सेक्टर। ट्रेंट लिमिटेड की स्थापना इसी बदलाव का हिस्सा थी। इसके तहत ही वेस्टसाइड जैसे आधुनिक डिपार्टमेंटल स्टोर की शुरुआत हुई, जिसने भारत में रिटेल संस्कृति को बदला। वे सिर्फ बिज़नेस लीडर ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता भी थीं। वे सर रतन टाटा इंस्टीट्यूट की चेयरपर्सन थीं, जहां महिलाओं के रोजगार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
सिमोन टाटा की बीमारी और अंतिम दिन
पिछले कुछ वर्षों से वे स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। अगस्त 2025 में उन्हें दुबई के किंग्स अस्पताल से प्रारंभिक इलाज के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल लाया गया था। कुछ समय सुधार के बाद वे जिनेवा लौट गईं, जहां 5 दिसंबर को उनका निधन हो गया।
परिवार और विरासत
सिमोन टाटा के पीछे उनका परिवार-बेटे नोएल टाटा, बहू आलू मिस्त्री, और पोते-पोती नेविल, माया और लिया टाटा हैं। टाटा समूह ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे "लैक्मे को भारत के अग्रणी कॉस्मेटिक ब्रांड के रूप में स्थापित करने और भारतीय रिटेल के नए दौर की शुरुआत के लिए हमेशा याद की जाएंगी।" उनके विज़न ने भारतीय महिलाओं के लिए कॉस्मेटिक्स को स्वीकार्य बनाया और भारतीय रिटेल उद्योग को आधुनिक रूप दिया।
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