Kerala Cabinet Formation 2026: सतीशन सरकार में IUML को 5 मंत्री पद, क्या है कांग्रेस का राजनीतिक गणित?
Kerala Cabinet Formation 2026: केरल में ठीक एक दशक (10 साल) बाद सत्ता में वापसी करने वाले 'यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट' (UDF) के मंत्रिमंडल का खाका पूरी तरह तैयार हो चुका है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के साथ सोमवार, 18 मई को कुल 20 मंत्रियों ने शपथ ली, जिसमें कांग्रेस के अलावा उसके सबसे बड़े गठबंधन सहयोगी 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' (IUML) को बड़ा प्रतिनिधित्व मिला है।
IUML की ओर से पांच विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा पार्टी ने यह भी ऐलान किया है कि ढाई साल बाद एक और नेता को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा।

IUML Ministers List Kerala 2026: कौन-कौन बने IUML से मंत्री?
तिरुवनंतपुरम के पालयम स्थित पानक्कड़ हॉल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में IUML के प्रदेश अध्यक्ष सैयद सादिकली शिहाब थंगल ने पार्टी के मंत्रियों के नामों की घोषणा की।
IUML की ओर से जिन नेताओं को मंत्री बनाया गया है, वे हैं:
- पीके कुन्हालिकुट्टी
- पीके बशीर
- एन शमसुद्दीन
- केएम शाजी
- वीई अब्दुल गफूर
इनमें पीके कुन्हालिकुट्टी सबसे वरिष्ठ नेता हैं, जबकि अन्य कई चेहरे पहली बार मंत्री पद संभालेंगे।
क्षेत्रीय संतुलन के लिए कांग्रेस का ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला
सैयद सादिकअली शिहाब थंगल ने बताया कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए एक विशेष समझौता किया गया है। सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद कोझिकोड से आने वाले आईयूएमएल विधायक परक्कल अब्दुल्ला को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा। हालांकि, जब थंगल से पूछा गया कि अब्दुल्ला के लिए वर्तमान 5 मंत्रियों में से कौन इस्तीफा देगा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, यह फैसला पार्टी भविष्य में सही समय पर सामूहिक रूप से लेगी।
विभागों पर अंतिम फैसला करेंगे वीडी सतीशन
IUML नेता पीके कुन्हालिकुट्टी ने कहा कि विभागों का अंतिम फैसला मुख्यमंत्री वीडी सतीशन करेंगे। उन्होंने कहा-IUML ने अपनी सिफारिशें मुख्यमंत्री को दी हैं, लेकिन हमने किसी विशेष मंत्रालय की मांग नहीं की है। विभागों का बंटवारा मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री विभागों की सूची राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर को भेजेंगे और मंजूरी के बाद आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।
क्या है कांग्रेस का राजनीतिक गणित?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, IUML को 5 मंत्री पद देना कांग्रेस की मजबूरी भी है और रणनीति भी। केरल की राजनीति में IUML लंबे समय से UDF का अहम हिस्सा रही है और खासकर मलप्पुरम तथा उत्तरी केरल के मुस्लिम बहुल इलाकों में उसका मजबूत प्रभाव है।
1. मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत रखना
कांग्रेस जानती है कि केरल में मुस्लिम वोट UDF की जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। IUML के जरिए कांग्रेस मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है।
2. उत्तरी केरल में संतुलन
IUML का सबसे मजबूत आधार मलप्पुरम, कोझिकोड और आसपास के जिलों में है। इन इलाकों में UDF को भारी समर्थन मिला। इसलिए कांग्रेस ने क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए IUML को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया।
3. गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना
UDF की सरकार कई सहयोगी दलों के समर्थन पर टिकी है। ऐसे में कांग्रेस नहीं चाहती कि सहयोगी दलों में असंतोष पैदा हो। पांच मंत्री पद देकर कांग्रेस ने IUML को स्पष्ट संदेश दिया है कि गठबंधन में उसकी अहम भूमिका बनी रहेगी।
4. भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिश
हाल के चुनाव में भाजपा ने 3 सीटें जीतकर केरल में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस अल्पसंख्यक वोटों के बिखराव को रोकना चाहती है ताकि भाजपा को और ज्यादा राजनीतिक जगह न मिले।
बीजेपी को मिला नया राजनीतिक मुद्दा
IUML को पांच मंत्री पद मिलने के बाद भाजपा ने कांग्रेस और UDF पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सत्ता बनाए रखने के लिए मुस्लिम लीग को जरूरत से ज्यादा महत्व दे रही है। भाजपा इस मुद्दे को हिंदुत्व और वोट बैंक राजनीति के संदर्भ में उठाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस का यह कदम धार्मिक आधार पर राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश है। हालांकि UDF नेताओं का कहना है कि IUML गठबंधन की मजबूत सहयोगी है और उसके 22 विधायक हैं, इसलिए उसे उसके राजनीतिक वजन के हिसाब से प्रतिनिधित्व मिला है।
कांग्रेस के लिए क्या है चुनौती?
हालांकि IUML को ज्यादा प्रतिनिधित्व देना कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौती भी बन सकता है। भाजपा पहले ही इसे मुस्लिम तुष्टिकरण के तौर पर पेश कर रही है और आने वाले समय में इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस को अब यह संतुलन साधना होगा कि एक तरफ सहयोगी दल खुश रहें और दूसरी तरफ विपक्ष के आरोपों का भी जवाब दिया जा सके।
वीडी सतीशन सरकार से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। UDF ने चुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, छात्राओं को आर्थिक सहायता और रोजगार से जुड़े कई बड़े वादे किए थे। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि नई सरकार इन वादों को कितनी तेजी से लागू करती है और भाजपा द्वारा उठाए जा रहे राजनीतिक सवालों का किस तरह सामना करती है।














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