शिवसेना का भाजपा से गठबंधन तोड़ने का ऐलान, अकेले लडे़गी 2019 लोकसभा चुनाव

नई दिल्ली। भाजपा की पुरानी साथी शिवसेना अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। शिवसेना ने मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गंठबंधन से अलग होने का ऐलान किया है। शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की जयंती पर 23 जनवरी को वरली के सरदार पटेल स्टेडियम में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। इस बैठक में ही ये फैसला किया गया है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने बताया कि पार्टी ने अपने अभिमान से समझौता ना करते हुए अकेले चुनाव में जाने का फैसला किया है। पार्टी आना वाला लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। बैठक में शिवसेना प्रमुख के पद पर उद्धव ठाकरे को दोबारा चुना गया। वहीं उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया है। शिवसेना के सांसद अनिल देसाई ने बताया कि केंद्रीय चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार पांच साल में एक बार कार्यकारिणी की बैठक होती है।

आदित्य का कद बढ़ा

आदित्य का कद बढ़ा

बैठक में उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि नितिन गड़करी ने नेवी के लोगों का मजाक उड़ाया और उन्हें घर ना देने की बात कही, ये हम सहन नहीं कर सकते। उन्होंने कश्मीर को लेकर भी पीएम मोदी पर दोहरा रवैया अपना की बात कही।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक में आदित्य ठाकरे का कद पार्टी में बढ़ाया गया है। आदित्य ठाकरे की बढ़ी जिम्मेदारी शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले सोमवार को शिवसेना नेताओं की एक अहम बैठक मातोश्री में हुई। इस बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को लेकर रूपरेखा तय की गई। इसी में तय किया गया कि पार्टी के युवा चेहरे और ठाकरे परिवार की चौथी पीढ़ी के नेता आदित्य ठाकरे का कद बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई। मंगलवार को दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की जयंती के मौके पर आदित्य ठाकरे को शिवसेना के राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य चुन लिया गया।

लंबे समय से चल रहा है भाजपा-शिवेसना में तनाव

लंबे समय से चल रहा है भाजपा-शिवेसना में तनाव

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवेसना के रिश्तों में 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही तनाव है। दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी भी लगातार हो रही है। 2014 के लोकसभा में दोनों पार्टियों ने गठबंधन में इलेक्शन लड़ने के बाद विधानसभा मे दोनों पार्टियां अलग हो गईं। हालांकि चुनाव बाद फिर से दोनों पार्टी साथ आईं और प्रदेश में सरकार बनाई। अभी भी दोनों पार्टियों की महाराष्ट्र में साझा सरकार है। केंद्र में भी शिवसेना सरकार में शामिल है लेकिन कई मुद्दों पर वो भाजपा सरकार पर हमले भी करती रही है।

क्या है दोनों पार्टियों की महाराष्ट्र में स्थिति

क्या है दोनों पार्टियों की महाराष्ट्र में स्थिति

भाजपा और शिवसेना महाराष्ट्र में बड़ी राजनीतिक ताकत हैं। शिवेसना लंबे समय तक भाजपा की सीनियर साथी रही है लेकिन फिलहाल हालात जुदा है। इस समय लोकसभा और विधानसभा दोनों में ही भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों में से भाजपा के पास 122 और शिवसेना के पास 63 सीटें हैं। भाजपा का ही इस समय महाराष्ट में मुख्यमंत्री है। वहीं लोकसभा की 48 सीटों में भाजपा के पास 23 और शिवसेना के पास 18 हैं।

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