महाराष्ट्र में भाजपा के साथ तनातनी के बीच शिंदे की शिवसेना ने इस राज्य को लेकर किया बड़ा फैसला
Rajasthan Politics: महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना में तनातनी बढ़ चुकी है। इसी सप्ताह सीएम फडणवीस की बैठक का शिंदे गुट के मंत्रियों ने किनारा कर लिया था। इसके बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद एकनाथ शिंदे ने एक अन्य राज्य को लेकर ऐसा निर्णय लिया है जो भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
दरअसल, राजस्थान में शिवसेना के शिंदे गुट ने भाजपा को अगले स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के लिए अल्टीमेटम दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद सिंह और यूथ विंग के अध्यक्ष सचिन सिंह गौड़ ने कहा कि दिसंबर तक उनके पास एक लाख सक्रिय कार्यकर्ता होंगे।

शिंदे गुट ने साफ कहा है कि राजस्थान में होने वाले आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे। एबीपी न्यूज के अनुसार शिवसेना ने चेतावनी दी है कि यदि भाजपा गठबंधन कर कुछ सीटें देती है, तो ठीक, अन्यथा पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी।
शिवसेना प्रमुख शिंदे 15 दिसंबर को करेंगे बैठक
पार्टी अध्यक्ष और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 15 दिसंबर को राजस्थान के प्रमुख नेताओं के साथ एक बैठक भी रखी है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। हाल ही में, कई अन्य पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने शिवसेना में शामिल होकर जिम्मेदारियां संभाली हैं।
राजस्थान में बढ़ी शिवसेना की गतिविधियां
पिछले साल तीन विधायकों के पार्टी में शामिल होने के बाद से शिवसेना शिंदे गुट ने राजस्थान में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक राजनीतिक दल होने के नाते स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ना उनकी मजबूरी है, ताकि कार्यकर्ता सक्रिय रहें।
शिवसेना ने भाजपा को दिया ये अल्टीमेटम
प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद सिंह और सचिन सिंह गौड़ ने कहा कि शिवसेना शिंदे गुट एनडीए का हिस्सा है और वे चाहते हैं कि भाजपा उन्हें स्थानीय निकाय चुनावों में उचित हिस्सेदारी दे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पर्याप्त सीटें नहीं मिलीं, तो वे अकेले ही चुनाव लड़ेंगे।
महाराष्ट्र चुनाव को लेकर क्या है शिवसेना का स्टैंड?
शिंदे गुट के नेताओं ने बताया कि केंद्र और महाराष्ट्र में उनका गठबंधन लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए है, लेकिन पंचायत और निकाय चुनाव लड़ना उनकी प्राथमिकता है। उनका कहना है कि पार्टी हर हाल में चुनाव लड़ेगी, भले ही भाजपा साथ न आए।












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