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शशि थरूर ने अब बताया कैसे बन सकते हैं आप एक अच्छे हिंदू, कहा- 'मैंने भी करने की कोशिश की थी'

Shashi Tharoor: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कांग्रेस सांसद और प्रसिद्ध लेखक शशि थरूर ने हिंदू धर्म की व्याख्या करते हुए इसकी विविधता, सहिष्णुता और व्यापकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म सिर्फ एक पूजा पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन जीने का मार्ग है, जिसमें आस्था और भक्ति के कई अलग-अलग रास्ते हैं।

थरूर ने समझाया कि हिंदू धर्म किसी एक विचारधारा या कट्टरता में नहीं बंधा है, बल्कि इसमें ज्ञान, भक्ति, ध्यान और कर्म जैसे विभिन्न मार्गों के माध्यम से ईश्वर की आराधना की जाती है। थरूर ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वामी विवेकानंद के विचारों के अनुसार, हिंदू धर्म कभी भी कट्टरता या नफरत को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि सभी विचारों और मान्यताओं को अपनाने वाला धर्म है।

Shashi Tharoor

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कांग्रेस सांसद और लेखक शशि थरूर ने हिंदू धर्म के चार प्रकार के मार्गों की चर्चा करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति इन मार्गों का पालन करके अच्छा हिंदू बन सकता है। थरूर ने हिंदू धर्म की व्यापकता और सहिष्णुता को समझाते हुए बताया कि हिंदू धर्म में किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं है और यह एक जीवन जीने का मार्ग है।
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ज्ञान योग - इस मार्ग के तहत व्यक्ति पढ़ाई और ज्ञान के माध्यम से आध्यात्मिक विचारों को समझता है। यह मार्ग ज्ञान और समझ की प्राप्ति के लिए होता है।

भक्ति योग - इस मार्ग में व्यक्ति भगवान की भक्ति करता है, जो अधिकतर लोग करते हैं। यह एक भावनात्मक और श्रद्धापूर्वक तरीका है ईश्वर के साथ संबंध स्थापित करने का।

राज योग - यह ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से सत्य की खोज करने का मार्ग है। व्यक्ति अपनी अंतरात्मा में जाकर सच्चाई को जानने की कोशिश करता है।

कर्म योग - महात्मा गांधी के सिद्धांत की तरह यह मार्ग है मानवता की सेवा करने और इसे ईश्वर की उपासना मानने का। इसमें व्यक्ति अपनी पूरी जीवन यात्रा को सेवा और परोपकार में समर्पित करता है।

हिंदू धर्म में कट्टरता की कोई जगह नहीं

थरूर ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में कभी भी कट्टरता और धार्मिक हिंसा (इनक्विजिशन) को बढ़ावा नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "हिंदू धर्म में यह कहने की कोई जगह नहीं है कि केवल मेरा ही तरीका सही है।"

थरूर ने कट्टरपंथी विचारधारा की आलोचना करते हुए कहा, "आज कुछ लोग हिंदू धर्म को ब्रिटिश फुटबॉल के उग्र समर्थकों की तरह बना रहे हैं। वे कहते हैं कि यदि तुम मेरी टीम का समर्थन नहीं करते, तो मैं तुम्हें मारूंगा। यदि तुम 'जय श्री राम' नहीं बोलते, तो मैं तुम्हें पीटूंगा। लेकिन यह हिंदू धर्म नहीं है।"

विवेकानंद के विचारों पर दिया जोर

थरूर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचारों में सहिष्णुता और विविधता का पालन किया गया है। स्वामी विवेकानंद ने कभी भी किसी को अपनी विचारधारा थोपने की अनुमति नहीं दी। थरूर ने इस बात को रेखांकित किया कि हिंदू धर्म का असली रूप सेवा, भक्ति, ध्यान और ज्ञान के मार्ग पर चलने वाला है, न कि नफरत फैलाने वाला।

कट्टरता से बचने की अपील

थरूर ने अपने बयान में हिंदू धर्म के मूल सिद्धांतों पर जोर देते हुए कट्टरता से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि सच्चा हिंदू वही है जो ज्ञान, भक्ति, ध्यान और कर्म के मार्ग पर चलता है, न कि हिंसा और नफरत के रास्ते पर।
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