'मंदिर सरकार के नहीं...', राम मंदिर को लेकर शशि थरूर ने BJP पर साधा निशाना, स्थापना समारोह को लेकर क्या बोले?
नए साल में 22 जनवरी को अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान् श्री राम की मूर्ति स्थापित की जानी है। इसे लेकर भव्य उत्सव की तैयारी की जा रही है।
योगी सरकार इस समारोह में शामिल होने के लिए तमाम राजनेताओं, अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसद इत्यादि को निमंत्रण भेज रही है। वहीं कांग्रेस सांसद का कहना है कि उन्हें समारोह में शामिल होने के लिए न्योता नहीं भेजा गया है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बुधवार, 27 दिसंबर को कहा कि उन्हें 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर मूर्ति-स्थापना समारोह के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है।
परोक्ष रूप से भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह धर्म को एक व्यक्तिगत विशेषता के रूप में देखते हैं, न कि राजनीतिक दुरुपयोग के लिए। केरल के सांसद ने अपनी पार्टी के सहयोगी सैम पित्रोदा की बात भी दोहराई कि मंदिर सरकार का मामला नहीं है।
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उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा,"मीडिया ने मुझसे पूछताछ की, जानना चाहा कि क्या मैं 22 जनवरी को अयोध्या जा रहा हूं। मैंने उन्हें बताया कि मुझे आमंत्रित नहीं किया गया था, लेकिन मैंने धर्म को एक व्यक्तिगत विशेषता के रूप में देखा, न कि राजनीतिक (गलत) उपयोग के लिए।"
भाजपा का नाम लिए बिना थरूर ने कहा कि मीडिया उन लोगों के हाथों में खेल रहा है जो मंदिर आयोजन से राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "मैंने यह भी बताया कि घटना की इतनी बड़ी खबर बनाकर, जिसके बारे में पहले से ही कुछ समय से पता चल रहा है, मीडिया उन लोगों के हाथों में खेल रहा था जो जनता का ध्यान उनकी शासन विफलताओं से भटकाते हुए राम मंदिर से राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं।"
थरूर ने आगे कहा, "मंदिर सरकार का व्यवसाय नहीं है। बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, लोक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा है। लेकिन मीडिया मंदिर को उन मुद्दों से ध्यान हटाने की अनुमति देता है।"
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क्या कहा सैम पित्रोदा ने?
कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि धर्म को राजनीति के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मुझे किसी भी धर्म से कोई दिक्कत नहीं है। कभी-कभार मंदिर जाना ठीक है, लेकिन आप उसे मुख्य मंच नहीं बना सकते। 40 फीसदी लोग बीजेपी को वोट देते हैं और 60 फीसदी लोग भाजपा को वोट नहीं देते हैं। वह सबके प्रधानमंत्री हैं, किसी पार्टी के प्रधानमंत्री नहीं और यही संदेश भारत के लोग उनसे चाहते हैं। रोजगार के बारे में बात करें, मुद्रास्फीति के बारे में बात करें, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और चुनौतियों के बारे में बात करें। उन्हें (लोगों को) तय करना होगा कि असली मुद्दे क्या हैं- क्या राम मंदिर असली मुद्दा है? या बेरोजगारी असली मुद्दा है। क्या राम मंदिर असली मुद्दा है या महंगाई असली मुद्दा है?"
आपको बता दें, इस कार्यक्रम के लिए राजनेताओं और बॉलीवुड हस्तियों सहित हजारों लोगों को आमंत्रित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिपरिषद के भी उत्सव में शामिल होने की उम्मीद है।
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कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी को भी इस उत्सव के लिए निमंत्रण मिला है। हालांकि, पार्टी ने इसकी पुष्टि नहीं की है कि वे इस कार्यक्रम में शामिल होंगे या नहीं।
वहीं, सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने मंगलवार को सरकार पर धर्म को राजनीति के साथ मिलाने का आरोप लगाया और समारोह में वीएचपी के निमंत्रण को ठुकरा दिया।
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