'इस तरह के कानून से विद्वेष फैलेगा', योगी के नेमप्लेट के फैसले पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए सवाल
Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार के कांवड़ रूट के दुकानों पर नेमप्लेट वाले फैसले को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। अब सोमवार (22 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने भी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इससे पहले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी योगी सरकार के इस फैसले की आलोचना की थी।
उत्तर प्रदेश की सरकार ने कांवड़ यात्रा के मार्ग पर स्थित भोजनालय और फलों समेत तमाम दुकानदारों को मालिकों और उनके द्वारा नियुक्त कर्मचारियों के नाम का खुलासा करने को कहा गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसपर रोक लगा दी है। योगी सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि ऐसे निर्देश से सिर्फ दोनों धर्मों में विद्वेष बढ़ेगा।

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी के फैसले पर क्या कहा?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ''देखिए इस तरह के कानून और फैसलों से सिर्फ दोनों धर्म के लोगों में विद्वेष फैलेगा। ये मेरा अपना सोचना है। बहुत से हिंदू ये कह सकते हैं कि देखो, फिर ये हमारे खिलाफ बात कर रहे हैं। लेकिन मैं जो कह रहा हूं ये सच है। आखिर हम ये कैसे कह दें कि ये सही है। क्यों...? सिर्फ इसलिए कि मुसलमाल की दुकान है और हिंदू नौकर है। बनाने वाला सब हिंदू हैं और मालिक जो हैं, वो गल्ला पर बैठकर मालिकाना कर रहा है।''
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- इस फैसले का आर्थिक असर पड़ेगा
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ''इस फैसले का आर्थिक असर पड़ेगा। आर्थिक असर पड़ेगा तो क्या होगा, मालिक की तो दुकान रहेगी लेकिन वो छटनी कर देगा। पर हिंदुओं की छटनी होगी। वहीं दूसरी बात ये है कि अगर आप हिंदू-मुसलमान की भावना को तेज करोगो तो, अभी मुसलमान ने हिंदू लोगों को काम के लिए रखा है, फिर बाद में, दोनों के बीच मतभेद होगा। ऐसा करने से हिंदू-मुस्लिम वाली भावना को बल मिलेगा। ये दोनों समुदाय में कड़वाहट की वजह बन जाएगी। पवित्रता का तो पता नहीं लेकिन इससे तकरार तो जरूर होगी।''
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कांवड़ यात्रा नेमप्लेट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खाद्य विक्रेताओं को मालिकों या कर्मचारियों के नाम लिखने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 26 जुलाई के लिए तय की है।
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या कांवड़िए यह उम्मीद करते हैं कि भोजन किसी खास श्रेणी के मालिकों द्वारा तैयार किया जाएगा। पीठ ने कहा, "हम उपरोक्त निर्देशों के प्रवर्तन पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश पारित करना उचित समझते हैं। हमें दुकानों पर ये बताना चाहिए कि वहां खाना कौन सा, वेज या नॉनवेज, या किस तरह का खाना मिलता है, ये लिखना चाहिए। लेकिन दुकानों के मालिकों, कार्यरत कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।"












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