'अपना धर्म नहीं छोड़ सकता', CM डीके शिवकुमार बोले- ईश्वर और व्यक्ति का रिश्ता राजनीति से ऊपर
Karnataka CM DK Shivakumar: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने एक बार फिर अपनी धार्मिक आस्था को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। शनिवार को उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म उनकी पहचान का अभिन्न हिस्सा है और शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करना पूरी तरह उनकी व्यक्तिगत पसंद थी, ना कि कोई राजनीतिक संदेश। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए व्यक्ति और ईश्वर के बीच का संबंध राजनीति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
धर्म व्यक्तिगत आस्था का विषय, राजनीति नहीं
पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिवकुमार ने कहा, "शपथ ग्रहण के समय हिंदू परंपराओं का पालन करना उनकी निजी श्रद्धा का हिस्सा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, "मेरे लिए राजनीति महत्वपूर्ण नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति और ईश्वर के बीच का संबंध है।"

सभी धर्मों के प्रति जताया सम्मान
डी.के. शिवकुमार ने कहा उन्हें सभी धर्मों और उनके संस्थानों के प्रति समान श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि चाहे ईसाई, सिख, बौद्ध या हिंदू धर्म हो, सभी आस्था केंद्र लोगों को ईश्वर से जोड़ने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महत्वपूर्ण अवसरों पर विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।
'कोई अपना धर्म नहीं छोड़ सकता'
मुख्यमंत्री ने कहा कि पद संभालने से पहले उन्होंने विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेताओं का आशीर्वाद लिया था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कोई व्यक्ति अपना नाम बदलकर अपना धर्म छोड़ सकता है। उनके अनुसार, धर्म व्यक्ति की पहचान का हिस्सा होता है और कोई भी आसानी से अपनी धार्मिक पहचान से अलग नहीं हो सकता।
मल्लघट्टा क्षेत्र के विकास पर दिया जोर
धार्मिक कार्यक्रम के दौरान शिवकुमार ने मल्लघट्टा क्षेत्र में चल रही करीब 35 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों और कडु सिद्धेश्वर मठ के अधिकारियों के साथ क्षेत्र में और विकास कार्यों की संभावनाओं पर चर्चा की गई है। सरकार क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
गंगाधेश्वर मंदिर से जुड़ी विशेष आस्था
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि वह पिछले करीब 25 वर्षों से मल्लघट्टा स्थित ऐतिहासिक गंगाधेश्वर मंदिर आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर आने से उन्हें शांति और खुशी का अनुभव होता है। उनके अनुसार, यह मंदिर उनके लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक संतुलन का केंद्र रहा है।
जनकल्याण और राज्य की समृद्धि के लिए प्रार्थना
शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने मंदिर में कोई व्यक्तिगत मन्नत नहीं मांगी। उनकी प्रार्थना हमेशा राज्य और समाज के कल्याण के लिए होती है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के लोगों की समृद्धि, शांति, सौहार्द, अच्छी बारिश और बेहतर फसल के लिए वह ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।
भक्त के रूप में पहुंचे कडु सिद्धेश्वर मठ
बाद में नोनविनकेरे स्थित श्री कडु सिद्धेश्वर मठ पहुंचकर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका इस धार्मिक संस्थान से वर्षों पुराना संबंध है। उन्होंने बताया कि वह यहां कई बार आ चुके हैं और इस यात्रा को मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक श्रद्धालु के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि मठ और उनका संबंध केवल एक भक्त और ईश्वर के बीच की आस्था पर आधारित है। Karnataka Politics: रामंलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा लिया वापस, आखिर क्यों लिया यूटर्न?












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