UN में चीन-पाकिस्तान को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका! अमेरिका के इस एक फैसले से इस्लामाबाद में मचा हड़कंप

US blocks UN 1267 sanction BLA: संयुक्त राष्ट्र में चीन और पाकिस्तान को उस समय बड़ा झटका लगा जब अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और मजीद ब्रिगेड को UN की 1267 टेरर सैंक्शंस लिस्ट में शामिल करने के प्रस्ताव को रोक दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का कहना है कि इन संगठनों के अल-कायदा या ISIS से सीधे संबंध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं।

इस फैसले को भारत के लिए कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारत ने फ्रांस के सहयोग से अमेरिका को अपने पक्ष में करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे चीन और पाकिस्तान की रणनीति को बड़ा झटका लगा।

US blocks UN 1267 sanction BLA

पाकिस्तान की रणनीति को लगा झटका

पाकिस्तान लंबे समय से BLA और मजीद ब्रिगेड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठन घोषित कराने की कोशिश कर रहा था। पहलगाम हमले और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस्लामाबाद ने इस अभियान को और तेज कर दिया। पाकिस्तान सेना प्रमुख Asim Munir की रणनीति का एक अहम हिस्सा इन संगठनों को UN सैंक्शंस लिस्ट में शामिल कराना था। लेकिन अमेरिका के रुख ने पाकिस्तान की इस योजना को बड़ा झटका दिया और उसका प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

अमेरिका ने क्यों रोका प्रस्ताव?

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में साफ कहा कि किसी संगठन को 1267 सैंक्शंस लिस्ट में शामिल करने के लिए उसका अल-कायदा या ISIS जैसे वैश्विक आतंकी नेटवर्क से संबंध साबित होना जरूरी है। वाशिंगटन का मानना है कि BLA और मजीद ब्रिगेड के मामले में ऐसे पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इसी वजह से अमेरिका ने प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी। पहले यह रोक छह महीने के लिए थी, जिसे बाद में और बढ़ाया गया। अब अमेरिका ने अपना विरोध खुलकर दर्ज करा दिया है।

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भारत और फ्रांस ने निभाई अहम भूमिका

रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने इस मुद्दे पर फ्रांस के साथ मिलकर सक्रिय कूटनीतिक प्रयास किए। दोनों देशों ने अमेरिका को यह समझाने की कोशिश की कि प्रस्ताव में कई तकनीकी और कानूनी कमियां हैं। इसके बाद अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोक दिया। फ्रांस और ब्रिटेन ने भी अमेरिकी रुख का समर्थन किया। यह घटनाक्रम दिखाता है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में भारत की बात अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक गंभीरता से सुनी जा रही है।

चीन की रणनीति पर भी सवाल

यह फैसला चीन के लिए भी असहज स्थिति पैदा करता है। बीजिंग अक्सर पाकिस्तान के हितों का समर्थन करता रहा है और कई बार भारत द्वारा पाकिस्तान आधारित आतंकियों के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों को रोकता या देर कराता रहा है। अमेरिका के इस कदम को ऐसे संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि वाशिंगटन आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर चीन की लाइन को बिना शर्त स्वीकार करने के मूड में नहीं है। इससे संयुक्त राष्ट्र में चीन की कूटनीतिक स्थिति पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

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अब पाकिस्तान के सामने क्या विकल्प?

UN 1267 सैंक्शंस व्यवस्था में प्रस्ताव रुकने के बाद पाकिस्तान अब दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों और वैकल्पिक प्रतिबंध तंत्रों की तलाश कर रहा है। इस्लामाबाद चाहता है कि BLA और मजीद ब्रिगेड के खिलाफ किसी न किसी रूप में वैश्विक कार्रवाई हो। हालांकि मौजूदा हालात में उसके लिए यह आसान नहीं दिख रहा। दूसरी ओर, भारत इस फैसले को आतंकवाद पर अपने लंबे समय से चले आ रहे रुख की जीत के रूप में देख रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है।

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