Shaheed Diwas 2023: 'देश से इश्क और मौत से शादी..' गजब मतवाले थे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का मानना था कि कानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है,जब तक वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे।

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Shaheed Diwas 2023: पूरा राष्ट्र आज अपने देश के वीर सपूतों के आगे नतमस्तक है, हमारी आजादी के पीछे ना जाने कितने मांओं ने अपने बेटों , सुहागिनों ने अपना सिंदूर और बहनों ने अपना भाई खोया है। हमें ये स्वतंत्रता बहुत सारी कुर्बानी के बाद मिली है, जिसे शब्दों में बयां ही नहीं किया जाता है। 23 मार्च उसी त्याग को याद दिलाता है क्योंकि आज के दिन को राष्ट्र 'शहीद दिवस' के रूप में मनाता है। आज के ही दिन साल 1931 में आजादी के तीन मतवालों क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई थी। जिस उम्र में लोग आने वाले जीवन को लेकर सपने संजोते हैं उस उम्र में इन लोगों ने फांसी को अपनी वरमाला बना लिया।

जॉन सैंडर्स की हत्या का आरोप

इन तीनों पर ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सैंडर्स की हत्या का आरोप था, क्योंकि उसने ही साइमन कमीशन के बहिष्कार का शांति से विरोध कर रहे लाला लाजपत राय पर समेत कई प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का आदेश दिया था, जिसकी वजह से लाला लाजपत राय की मौत हो गई थी और इसी मौत का बदला लेने के लिए दिसंबर 1928 में भगत सिंह, राजगुरु ने सॉन्डर्स की हत्या कर दी थी। इस योजना में सुखदेव और चंद्रशेखर आजाद भी शामिल थे।

'बहरों को सुनाने के लिए आवाज जोरदार करनी ही होगी'

इस घटना के बाद भगत सिंह ने 'पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिल' के विरोध में भगत सिंह ने सेंट्रल असेंबली में बम फेंका था। हालांकि इसके बाद वो अरेस्ट हो गए और कोर्ट में उन्होंने कहा था कि 'बहरों को सुनाने के लिए आवाज जोरदार करनी ही होगी।' आजादी के इन शूरवीरों को कोर्ट फांसी का आदेश दे दिया था।

इसलिए 23 मार्च को शहीद दिवस

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान को याद करने के लिए हर साल 23 मार्च को ये दिन शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं, जिससे कि हमारी युवा पीढ़ी और बच्चों को उनके बलिदान के बारे में पता हो और वो ये भी जाने कि आजादी की सांस बहुत सारे त्यागों से मिली है। वनइंडिया परिवार भी देश के इन वीरों को नमन करता है।

पढ़ें इन शहीदों के प्रेरणाश्रोत कथन

  • अगर बहरों को सुनाना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा।
  • जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है। दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।।
  • मेरा धर्म देश की सेवा करना है।
  • देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं।
  • इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से। अगर मैं इश्क लिखना भी चाहूं तो इंकलाब लिख जाता है।।
  • इश्क़ करना हमारा पैदायशी हक़ है ,तो क्यों न वतन ए मिट्टी को अपना महबूब बना लें।
  • व्यक्तियों को कुचल कर, वे विचारों को नही मार सकते। इंकलाब आएगा।

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