वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे की सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी, अर्नब की सुनवाई याचिका तुरंत कैसे लिस्ट हो जाती है
दुष्यंत दवे की SC को चिट्ठी, अर्नब की याचिका तुरंत कैसे लिस्ट हो जाती है
नई दिल्ली। सीनियर वकील दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में रिपब्लिक टीवी के एडिटर और अर्नब गोस्वामी की याचिका को प्राथमिकता दिए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं और इस पर आपत्ति जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को लिखी चिट्ठी में पूछा है कि क्या चीफ जस्टिस एस.ए. बोबडे ने अर्णब के केस में तुरंत सुनवाई के लिए विशेष निर्देश दे रखे हैं। अगर ऐसा नहीं है तो उनको इस तरह विशेष सहूलियत कैसे मिल जा रही है। दवे ने कहा है कि गोस्वामी की याचिका की तत्काल लिस्टिंग में आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग दिख रहा है, जिससे एक अच्छा मैसेज नहीं जा रहा है।

अर्जी पर अगले ही दिन सुनवाई को लेकर सवाल
टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी को बीते हफ्ते मुंबई पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार किया था। गोस्वामी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बेल के लिए अर्जी जाली थी। जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए निचली अदालत में जाने को कहा था। इसके बाद मंगलवार को अर्नब ने मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जिस पर एक दिन बाद आज सुनवाई हो रही है। दुष्यंत दवे ने याचिका आते ही उसके लिस्ट होने और अगली सुबह ही सुनवाई किए जाने पर सवाल पूछा है।
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अर्नब गोस्वामी से निजी तौर पर मेरा कोई मसला नहीं: दवे
दुष्यंत दवे ने रजिस्ट्री के महासचिव को मंगलवार रात लिखी चिट्ठी में कहा है, मैं यह पत्र सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन के अध्यक्ष की हैसियत से कल जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की बेंच में सुनवाई के लिए लिस्ट की गई याचिका के खिलाफ विरोध जाहिर करने के लिए लिख रहा हूं। मेरा अर्नब गोस्वामी से निजी तौर पर कोई विरोध नहीं है। ना मेरी कोशिश ये है कि सुप्रीम कोर्ट के याचिका पर सुनवाई के अधिकार में किसी तरह का हस्तक्षेप किया जाए। गोस्वामी को भी एक नागरिक की तरह अदालत न्याय की मांग करने का हक है लेकिन मेरा सवाल किसी को इस तरह असाधारण तौर पर प्राथमिकता दिए जाने को लेकर है।

क्या मुख्य न्यायाधीश ने कुछ विशेष निर्देश दे रखे हैं?
दुष्यंत दवे ने कहा है- क्या इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश और रोस्टर मास्टर ने कुछ विशेष निर्देश दे रखे हैं। क्योंकि अप्रत्याशित तौर पर किसी केस की सुनवाई के लिए तत्काल लिस्टिंग चीफ जस्टिस के विशेष आदेश के बिना नहीं हो सकती है और न होती है। मेरा आपसे भी सवाल है कि प्रशासकीय प्रमुख के रूप में आप या रजिस्ट्रार अर्नब गोस्वामी को विशेष महत्व क्यों दे रहे हैं।
दवे ने पूछा कि जब लिस्टिंग के लिए कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है जिसमें काम ऑटोमैटिक लेवल पर होता है तो फिर इस तरह की सेलेक्टिव लिस्टिंग क्यों हो रही है? ऐसा क्यों हो रहा है कि केस इधर से उधर घूम रहे हैं और वो भी कुछ खास बेंचों में ही। दवे ने कहा है कि जब तक लिस्टिंग के लिए फुलप्रूफ सिस्टम लागू नहीं हो जाए तब तक गोस्वामी की याचिका की भी लिस्टिंग नहीं होनी चाहिए।












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