Jayant Narlikar Passed Away: कौन थे पद्म विभूषण जयंत नार्लीकर, जो किस्सों में सिखाते थे साइंस थ्योरी
Jayant Narlikar Passed Away: पद्म विभूषण से सम्मानित देश के मशहूर वैज्ञानिक जयंत नार्लीकर (Jayant Narlikar) का पुणे के उनके आवास में निधन हो गया है। 87 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके परिवार में तीन बेटियां हैं। परिवार ने बताया कि नींद में ही उनका निधन हो गया। कुछ दिन पहले ही उनकी कूल्हे की सर्जरी हुई थी। वह देश के अग्रणी खगोल वैज्ञानिक थे। विज्ञान क्षेत्र में अहम योगदान के साथ ही उन्हें देश की कई वैज्ञानिक रिसर्च संस्थाओं को तैयार करने के लिए भी जाना जाता है। इसके अलावा, उन्होंने विज्ञान के कठिन तथ्यों को किस्से-कहानियों के जरिए सुनाकर घर-घर तक पहुंचाने का काम किया था।
Jayant Narlikar Passed Away
विज्ञान जगत में अपनी उपलब्धियों की वजह से डॉक्टर जयंत नार्लीकर को देश-विदेश में कई सम्मान मिले थे। उन्हें साल 2004 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था और 2011 में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें राज्य के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार महाराष्ट्र भूषण से नवाजा था। 1988 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने डॉ. नार्लीकर को अंतर-विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी केंद्र (IUCAA) के संस्थापक निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी थी। अपनी सेवानिवृति तक वह IUCAA के डायरेक्टर रहे। इसके अलावा, उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में खगोल विज्ञान केंद्र की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। डॉक्टर नार्लीकर ने बीएचयू से अपनी शुरुआती पढ़ाई की थी और उच्च शिक्षा के लिए कैंब्रिज गए थे।

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किस्से-कहानियों के जरिए समझाते थे विज्ञान के तर्क
डॉक्टर जयंत नार्लीकर को उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ ही एक बेहतरीन विज्ञान प्रस्तोता के तौर पर भी पहचाना जाता है। अपने रेडियो और टीवी शो के जरिए वह विज्ञान के तथ्यों को बहुत सरल और रोचक अंदाज में पेश किया करते थे। उन्होंने आसान भाषा में लोगों तक वैज्ञानिक सिद्धांतो को पहुंचाने के लिए कई किताबें भी लिखी थीं। इन्हीं उपलब्धियों की वजह से संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को ने 1996 में लोकप्रिय विज्ञान कार्यों के लिए कलिंग पुरस्कार से सम्मानित किया था।
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