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Fact Check: ब्रह्मोस मिसाइल से घबराया पाकिस्‍तान, एएस कुमार को DRDO वैज्ञानिक बताकर फर्जी लेटर करवाया वायरल

Fact Check BrahMos Missile: ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पूरा पाकिस्‍तान सदमे में है। भारतीय सैन्‍य ताकत के सामने थर-थर कांप रहे पाकिस्‍तान को सबसे बड़ा डर तो ब्रह्मोस मिसाइल का सता रहा है। इसी वजह से पाकिस्‍तान झूठ पर झूठ बोलने से बाज नहीं आ रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल और DRDO वैज्ञानिक के नाम से सोशल मीडिया में फर्जी खबरें फैला रहा है।

पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया पर अकाउंट्स से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिक एएस कुमार द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र ऑनलाइन प्रसारित किया जा रहा है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल के घटकों में खराबी का आरोप लगाया गया है। वायरल पत्र पर 3 मई 2025 की डेट लिखी हुई है। पत्र में एएस कुमार को ARDE का डायरेक्‍टर बताया गया है।

Fact Check BrahMos missile

PIB Fact Check ने बताई सच्‍चाई

ब्रह्मोस मिसाइल के घटकों में खराबी के आरोप वाला यह वायरल लेटर फेक है। इसकी पुष्टि भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने की है। पीआईबी फैक्‍ट चेक में कहा गया है कि यह वायरल पत्र फेक है। DRDO India ने ऐसा कोई ने ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया है। आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (ARDE) में एएस कुमार नाम का कोई वैज्ञानिक नहीं है।

What is Brahmos missile: ब्रह्मोस मिसाइल क्‍या है?

ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत के DRDO और रूस के NPO मशिनोस्ट्रोयेनिया का एक संयुक्त उपक्रम है, जिसकी स्थापना सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' के विकास के लिए हुई थी। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदियों से मिलकर बना है। यह मिसाइल पी-800 ओनिक्स पर आधारित है और इसे जमीन, हवा, समुद्र और पनडुब्बी से दागा जा सकता है।

ब्रह्मोस की गति मैक 2.8 से 3.0 तक होती है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में से एक बनाती है। इसकी 800 किमी तक की रेंज और अत्यधिक सटीकता इसे रणनीतिक हथियार बनाते हैं। यह पारंपरिक और परमाणु दोनों पेलोड ले जाने में सक्षम है।

2007 में भारतीय सेना ने इसकी पहली रेजिमेंट तैनात की, और अब तक कई संस्करणों (ब्लॉक I, II, III) का सफलतापूर्वक विकास हो चुका है। 2024 में नौसेना ने 800 किमी रेंज वाली 220 ब्रह्मोस मिसाइलों का ऑर्डर दिया। भविष्य में ब्रह्मोस-II हाइपरसोनिक मिसाइल के रूप में इसकी क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें- Fact Check: ऑपरेशन सिंदूर से घबराए पाकिस्तानी फैला रहे फर्जी खबरें, राफेल-MiG को गिराने का दावा निकला झूठा

Fact Check

दावा

एएस कुमार को वैज्ञानिक बताकर ब्रह्मोस मिसाइल के घटकों में खराबी का दावा।

नतीजा

DRDO ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया है। ARDE) में एएस कुमार नाम का कोई वैज्ञानिक नहीं है।

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फैक्ट चेक करने के लिए हमें [email protected] पर मेल करें
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