'अपने बायोडाटा में ये लिखिए', विश्वविद्यालय कुलपति के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में SC का आया अहम फैसला
Supreme Court on vice chancellor: पश्चिम बंगाल एनयूजेएस विश्वविद्यालय (University of Juridical Sciences) के कुलपति निर्मल कांति चक्रवर्ती के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। हालांकि, न्यायालय ये फैसला चुनाते हुए बड़ा आदेश भी दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कुलपति के रिज्यूम में ये केस और आरोप लिखा जाए। इसका पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

पीड़िता ने 26 दिसंबर 2023 को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि यौन उत्पीड़न अप्रैल 2019 में हुआ था। स्थानीय शिकायत समिति (एलसीसी) ने शिकायत को समय-बाधित मानते हुए खारिज कर दिया था, क्योंकि शिकायतकर्ता ने तीन महीने की निर्धारित सीमा और छह महीने की विस्तारित सीमा दोनों का उल्लंघन किया था।
पीड़िता के अनुसार, कुलपति चक्रवर्ती ने जुलाई 2019 में विश्वविद्यालय में कार्यभार संभाला। दो महीने बाद, 8 सितंबर को, उन्होंने पीड़िता को अपने कार्यालय में बुलाया और डिनर के लिए अनुरोध किया। उन्होंने महिला के हाथ को छुआ, जिससे वह असहज महसूस कर रही थी। इसके बाद महिला चुपचाप वहां से चली गई।
अक्टूबर 2019 में, कुलपति ने उसे दोबारा अपने कार्यालय में बुलाया और डिनर के प्रस्ताव के बारे में पूछा। पीड़िता ने स्पष्ट रूप से मना कर दिया और कहा कि वह केवल पेशेवर संबंध बनाए रखना चाहती है। इसके बाद, कुलपति ने कथित तौर पर यौन संबंध बनाने की मांग की और उसे धमकी दी।
अक्टूबर 2019 में, पीड़िता की पदोन्नति रोक दी गई, जिसे अंततः 2 अप्रैल 2022 को कार्यकारी परिषद ने मंजूरी दी। अप्रैल 2023 में, कुलपति ने पीड़िता को एक रिसॉर्ट में आने को कहा, जिसे उसने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद, उसे करियर बर्बाद करने की धमकी दी गई।
29 अगस्त 2023 को, सेंटर ऑफ फाइनेंशियल, रेगुलेटरी एंड गवर्नेंस स्टडीज (CFRGS) से महिला को निदेशक पद से हटा दिया गया। उसी समय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और नेशनल फाउंडेशन ऑफ कॉर्पोरेट गवर्नेंस (NFCG) से प्राप्त अनुदान के दुरुपयोग के मामले में पीड़िता के खिलाफ जांच शुरू की गई। कार्यकारी परिषद ने एनयूजेएस को 1 लाख रुपये तुरंत वापस करने का आदेश दिया।
पीड़िता ने ई-मेल के माध्यम से कार्यकारी परिषद और कुलपति से उत्पीड़न और बदले की शिकायत की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निदेशक पद से हटाना यौन उत्पीड़न नहीं माना जाएगा, क्योंकि यह एनएफसीजी की स्वतंत्र रिपोर्ट पर आधारित था। इस कार्रवाई को पिछली कथित घटनाओं से जोड़ा नहीं जाएगा।












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