पाक में मेजर बना भारतीय जासूस रवींद्र कौशिक, 20 हजार सैनिकों की बचाई जान, सलमान करेंगे इनकी बायोपिक में काम

पाक में मेजर बना भारतीय जासूस रवींद्र कौशिक, 20 हजार सैनिकों की बचाई जान, सलमान करेंगे इनकी बायोपिक में काम

नई दिल्ली, 17 जून: बॉलीवुड एक्टर सलमान खान पहली बार किसी बायोपिक फिल्म में काम करने वाले हैं। यह फिल्म भारतीय जासूस रवींद्र कौशिक के जीवन पर आधारित होगी। इस फिल्म को राजकुमार गुप्ता डायरेक्ट कर सकते हैं। फिलहाल रवींद्र कौशिक की बायोपिक फिल्म का नाम फाइनल नहीं हुआ है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सलमान खान जल्द ही इस फिल्म को लेकर घोषणा कर सकते हैं। ये फिल्म एक एक्शन थ्रिलर फिल्म होगी। भारतीय जासूस रवींद्र कौशिक को ब्लैक टाइगर के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि रवींद्र कौशिक से अच्छा और सफल भारतीय जासूस आजतक कोई नहीं हुआ। रवींद्र कौशिक पाकिस्तान में किस स्तर की जासूसी कर रहे थे इसका अंदाजा आप इसी बात लगा सकते हैं कि वह पाकिस्तानी सेना में मेजर के पद पर पहुंच गए थे।

जानिए भारतीय जासूस रवींद्र कौशिक के बारे में?

जानिए भारतीय जासूस रवींद्र कौशिक के बारे में?

रवींद्र कौशिक को पाकिस्तान सेना के रैंक में घुसने के लिए भारत का सबसे अच्छा जासूस माना जाता है। रवींद्र कौशिक का जन्म 11 अप्रैल 1952 को राजस्थान के श्री गंगानगर राजस्थान में हुआ था। उन्होंने वहां से ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की थी। टीनएजर की उम्र से ही कौशिक को थिएटर और एक्टिंग करने का शौक था। एक बार रवींद्र कौशिक ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक राष्ट्रीय स्तर की नाटकीय बैठक में हिस्सा लिया था। इसी दौरान रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के अधिकारियों ने उसे देखा। उसके बाद रॉ के अधिकारियों ने कौशिक से संपर्क किया और उन्हें अंडरकवर ऑपरेटिव होने की नौकरी का ऑफर दिया।

मुस्लिम बनने के लिए 'खतना' तक करवाया रवींद्र कौशिक ने

मुस्लिम बनने के लिए 'खतना' तक करवाया रवींद्र कौशिक ने

रॉ की भारतीय जासूस बनेन की नौकरी रवींद्र कौशिक ने स्वीकार कर ली। ऐसा कहा जाता है कि कौशिक ने उर्दू सीखी थी। ट्रेनिंग के दौरान उसने खुद मुस्लिम धार्मिक ग्रंथों को पढ़ा। यहां तक कि पाकिस्तान में कोई उनके मुस्लिम होने पर कोई शक ना करे, इसलिए खतना भी करवाया था। कौशिक ने पाकिस्तान के इलाके के बारे में भी काफी जानकारी ले ली थी। कौशिक को दो साल तक दिल्ली में एक ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग में कौशिक को एक मुस्लिम बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। पंजाब के साथ राजस्थान की सीमा के पास श्री गंगानगर से होने के कारण, कौशिक पंजाबी अच्छे से जानते थे, जिसे पंजाबी को पाकिस्तान में अच्छे से लोग जानते थे।

23 साल की उम्र में नबी अहमद शाकिर बन पाक गए कौशिक

23 साल की उम्र में नबी अहमद शाकिर बन पाक गए कौशिक

ट्रेनिंग पूरा होने के बाद 23 साल की उम्र में 1975 में रवींद्र कौशिक पाकिस्तान गए। उनका अब नया नाम था- नबी अहमद शाकिर। रॉ ने रवींद्र कौशिक को पाकिस्तान भेज भारत में उनके सभी रिकॉर्ड को नष्ट कर दिए। अब रवींद्र कौशिक नबी अहमद शाकिर था। पाकिस्तान पहुंचकर कौशिक ने बदले हुए नाम के साथ कराची विश्वविद्यालय से एलएलबी पूरा किया और पाकिस्तानी सेना में शामिल हो गए। पाकिस्तानी सेना में शामिल होकर वह एक कमीशन अधिकारी बन गए। जिसके बाद उनके अच्छे कामों को देखते हुए उन्हें मेजर के पद पर पदोन्नत किया गया। वहां पर नबी अहमद शाकिर ने अमानत नाम की एक महिला से शादी की और एक लड़की के पिता बने।

20 हजार भारतीय सैनिकों की कौशिक ने बचाई जान

20 हजार भारतीय सैनिकों की कौशिक ने बचाई जान

1979 से 1983 तक रवींद्र कौशिक ने पाकिस्तान से भारतीय रक्षा बलों के लिए कई महत्वपूर्ण जानकारियां भेजी। उनकी भेजी हुई जानकारियों से 20 हजार भारतीय सैनिकों की जान बच पाई थी। नबी अहमद शाकिर यानी कौशिक द्वारा भेजी जा रही जानकारियां भारतीय रक्षा बलों के लिए इतनी ज्यादा जरूरी हो गई थी कि उन्हे भारतीय रक्षा क्षेत्रों में 'द ब्लैक टाइगर' के नाम से पुकारा जाने लगा। रवींद्र कौशिक 'द ब्लैक टाइगर' के नाम से भारतीय रक्षा बलों में प्रसिद्ध हो गए। रवींद्र कौशिक को 'द ब्लैक टाइगर' का नाम तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने खुद दिया था।

मुल्तान जेल में रवींद्र कौशिक की हुई मौत

मुल्तान जेल में रवींद्र कौशिक की हुई मौत

द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक रवींद्र कौशिक उस वक्त पकड़े गए थे, जब रॉ ने उनसे संपर्क करने के लिए इनायत मसीहा को भेजा था। इनायत मसीहा ने अनजाने में सितंबर 1983 में पूछताछ के दौरान पाकिस्तानी सेना के सामने सच ला दिया। रवींद्र कौशिक को 1985 में जासूसी के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। लेकिन बाद में पाकिस्तानी सरकार ने सजा को घटाकर आजीवन कारावास कर दिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक रवींद्र कौशिक को सियालकोट के एक पूछताछ केंद्र में 2 साल तक प्रताड़ित किया गया। वैसा ही काम कौशिक के साथ मियांवाली में भी हुई। उसके बाद रवींद्र कौशिक को 16 साल की जेल हुई और उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया गया। नवंबर 2001 में कौशिक ने ट्यूबरक्लोसिस और हृदय रोग के कारण दम तोड़ दिया। न्यू सेंट्रल मुल्तान जेल में रवींद्र कौशिक की मृत्यु हो गई। रवींद्र कौशिक को उस जेल के पीछे दफनाया गया था।

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