शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल ने की थी आतंकियों से लड़ने की जिद

श्रीनगर। शुक्रवार को कश्‍मीर के बारामूला के उरी सेक्‍टर में आतंकियों के हमले में सेना ने अपने नौ बहादुरों को खो दिया। इस हमले में झारखंड रांची के लेफ्टिनेंट कर्नल सकंल्‍प शुक्‍ला भी शहीद हों गए।

रविवार को हुआ अंतिम संस्‍कार

रविवार को जब लेफ्टिनेंट कर्नल का पूरे राजकीय सम्‍मान के साथ अंतिम संस्‍कार किया जा रहा था तो हर किसी की आंख नम थी।शुक्रवार को उरी में शहीद हुए नौ जवान भारतीय सेना की बहादुरी की मिसाल हैं तो वहीं लेफ्टिनेंट कर्नल ने दुनिया के सामने साबित कर दिया कि क्‍यों इंडियन आर्मी सर्वश्रेष्‍ठ सेनाओं में से एक है।

फील्‍ड एरिया के लिए फिट नहीं थे संकल्‍प

लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्‍प कुमार अप्रैल 2003 में श्रीनगर में एक हमले के दौरान गंभीर रूप से जख्‍मी हो गए थे। उनके पेट में एके-47 के कई घाव थे और करीब 40 टांकों के साथ उनका पेट सिला गया था।

वह ठीक तो हो गए थे लेकिन फील्‍ड एरिया के लिए फिट नहीं थे। बैटल कैजुअलिटी ने उन्‍हें इस तरफ से कमजोर कर दिया था लेकिन इसके बाद भी उन्‍होंने जिद करके कश्‍मीर में ही सर्व करने का फैसला किया। 24 पंजाब रेजीमेंट के संकल्‍प अपनी पलटन और अपनी रेजीमेंट से बहुत प्‍यार करते थे।

इस वजह से कहीं और जाने के बजाय उन्‍होंने सिर्फ कश्‍मीर में ही ड्यूटी करने का फैसला किया। उनके स‍ाथियों को जब उनके बारे में पता लगा तो उनका मन भी भारी हो गया।

uri shaheed

आपकी शहादत को हमारा सलाम

लेफ्टिनेंट कर्नल ने अपनी मां से वादा किया था कि अबकि बार जब वह घर आएंगे तो कर्नल बनकर लौटेंगे, लेकिन उनके घर वालों को अब बस उनका इंतजार रहेगा।

उरी की 31 फील्‍ड रेजीमेंट की 24 पंजाब रेजीमेंट के लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्‍प कुमार, हवलदार सुभाष चंद्र, लांसनायक गुरमेल सिंह, गनर मनप्रीत सिंह, लांसनायक सुख‍विंदर सिंह, नायक पन्‍ना लाल, डीएमटी कुलदीप कुमार और गनर सतनाम सिंह की शहादत को वनंइडिया सलाम करता है।

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