पंजाब की निशा कैसे बनीं साध्वी ऋतंभरा? पद्म भूषण मिलते ही क्यों वायरल हो रहे राम मंदिर आंदोलन वाले ये वीडियो?
Sadhvi Ritambhara Padma Bhushan: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज मंगलवार 27 मई 2025 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में 68 प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। साध्वी ऋतंभरा को समाजसेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म भूषण पुरस्कार मिलने पर उनके राम मंदिर आंदोलन में भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे हैं।
जीवन परिचय: निशा से दीदी माँ तक की यात्रा
साध्वी ऋतंभरा का जन्म 31 दिसंबर 1963 को पंजाब के लुधियाना जिले के दोराहा कस्बे में हुआ था। बचपन में उनका मूल नाम 'निशा' था। 16 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़कर हरिद्वार में स्वामी परमानंद से दीक्षा ली और आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर हुईं। इसके बाद पंजाब की निशा साध्वी ऋतंभरा बन गई और अब दीदी मां के नाम से पहचान बना चुकी हैं।

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राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका
1990 के दशक में साध्वी ऋतंभरा ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के महिला संगठन दुर्गा वाहिनी की स्थापना की और राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके ओजस्वी भाषणों ने उन्हें 'फायरब्रांड' वक्ता के रूप में प्रसिद्धि दिलाई।
वात्सल्य ग्राम: सेवा और समर्पण का प्रतीक
साध्वी ऋतंभरा ने वृंदावन में 'वात्सल्य ग्राम' की स्थापना की, जो अनाथ बच्चों, विधवाओं और बुजुर्गों के लिए एक समर्पित आश्रय स्थल है। यहां पारिवारिक वातावरण में बच्चों का पालन-पोषण किया जाता है, जिससे वे आत्मनिर्भर और संस्कारित बन सकें।
पद्म पुरस्कार 2025
बता दें कि इस वर्ष सरकार ने 139 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है, जिनमें सात पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। प्रथम अलंकरण समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने वर्ष 2025 के लिए 71 प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए।
आज दूसरे अलंकरण समारोह में कुल 68 प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। इनमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और कुमुदनी रजनीकांत लाखिया को क्रमशः सार्वजनिक मामलों और कला के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा।
पद्म भूषण से सम्मानित होने वालों में जतिन गोस्वामी, कैलाश नाथ दीक्षित, साध्वी ऋतंभरा शामिल हैं, जबकि प्रसिद्ध अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय को मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। जिन लोगों को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा उनमें मंदा कृष्णा मडिगा, डॉ. नीरजा भाटला, संत राम देसवाल और सैयद ऐनुल हसन शामिल हैं।












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