रूस का नया दावा- इस उम्र तक के लोगों को दिया जाएगा कोरोना वैक्सीन का डोज

नई दिल्ली। रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्‍सीन तैयार कर ली है। रूस कोरोना वैक्‍सीन का सितंबर 2020 से बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर देगा। इसके बाद अक्‍टूबर से वहां वैक्‍सीनेशन अभियान शुरू कर दिया जाएगा। अब रूस ने इस कोरोना वैक्सीन को लेकर एक और अहम खुलासा किया है। शीर्ष रूसी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि इस नई कोरोनो वायरस वैक्सीन के डोज सिर्फ 18 से 60 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को दिए जा सकेंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा कि वृद्ध लोगों के लिए अधिक क्लिनिकल स्टडीज की आवश्यक हैं और उम्मीद है कि यह पंजीकरण के बाद क्लिनिकल ट्रायल के दौरान किया जाएगा।

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    60 साल से ऊपर के लोगों को नहीं दी जाएंगी रूसी कोरोना वैक्सीन

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    रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय के वैज्ञानिक औषधीय उत्पाद मूल्यांकन केंद्र के प्रमुख व्लादिमीर बोंदरेव ने कहा कि रूस में जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को [टीके के लिए] प्रमाणित करने की प्रथा है। कोरोना वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल में 18 से 60 वर्ष की आयु के स्वयंसेवकों के समूह पर किया गया है। इस प्रकार, यह टीका अभी 18 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए है। वहीं एक न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि, 18 साल से कम और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को इसलिए वैक्सीन नहीं लगाई जाएंगी क्योंकि इन लोगों पर पड़ने वाले असर को लेकर फिलहाल पूरी जानकारी मौजूद नहीं है यानी इस पर अभी स्टडी नहीं की गई है। वहीं डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेग्नेंट और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी।

    इस टीके की पहली खेप अगले दो हफ़्तों में आ जाएगी

    इस टीके की पहली खेप अगले दो हफ़्तों में आ जाएगी

    गामालेया साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के निदेशक अलेक्जेंडर गेन्सबर्ग ने कहा कि उन्हें टीका लगाया गया था। उन्हें अच्छा अच्छा महसूस हो रहा है। बता दें कि, अलेक्जेंडर गेन्सबर्ग की 65 साल से अधिक उम्र के हैं। रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने कहा कि, इस टीके की पहली खेप अगले दो हफ़्तों में आ जाएगी और पहले ये मुख्य तौर पर डॉक्टरों को दिया जाएगा। मंत्री ने बताया कि टीकाकरण पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा। उन्होंने कहा कि जिन डॉक्टरों को लगता है कि उनके पास पहले से ही कोरोनो वायरस से लडने के लिए प्रतिरक्षा क्षमता लगभग 20 प्रतिशत हैं और सोचते हैं कि उन्हें टीकाकरण की आवश्यकता नहीं है तो यह तय करना उनके ऊपर होगा।

    रूस ने कोरोना वैक्सीन पर शक करने वालों को दिया जवाब

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    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रूस की जरूरतों को कवर करना एक प्राथमिकता है, लेकिन वैक्सीन को विदेशों में भी निर्यात किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन को हम दूसरे देशों को भी देंगे लेकिन घरेलू बाजार की जरूरतें हमारी प्राथमिकता हैं। रूसी स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड-19 के खिलाफ विकसित की गई वैक्सीन निश्चित रूप से कारगर है और यह अन्य देशों को भी उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन घरेलू स्तर पर इसकी मांग को ध्यान में रखकर आपूर्ति करना हमारी पहली प्राथमिकता है।

    पहला टीका पुतिन की बेटी को दिया गया

    पहला टीका पुतिन की बेटी को दिया गया

    मिखाइल मुराश्को ने बुधवार को रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स से कहा, ऐसा लगता है जैसे हमारे विदेशी साथियों को रूसी दवा के प्रतियोगिता में आगे रहने के फायदे का अंदाजा हो गया है और वो ऐसी बातें कर रहे हैं जो कि बिल्कुल ही बेबुनियाद हैं। रूस ने वैक्सीन का विकास निश्चित क्लीनिकल जानकारी और डाटा को ध्यान में रखकर किया है। रूस के टीका बना लेने की घोषणा मंगलवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की थी जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनके वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की ऐसी वैक्सीन तैयार कर ली है जो कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर है। पुतिन ने साथ ही ये भी कहा था कि ये टीका उनकी बेटी को भी दिया गया है।

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