जनरल रावत के बयान पर मचा बवाल, सेना की ओर से आई ये सफाई
नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत नये नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाले लोगों की सार्वजनिक आलोचना करके गुरुवार को विवादों में घिर गए। उन्होंने कहा था कि छात्रों और अन्य लोगों की भीड़ का नेतृत्व करते हुए हिंसा फैलाना लीडरशिप नहीं है। सेना प्रमुख के इस बयान की विपक्षी दल और कुछ सेना के पूर्व अधिकारियों ने निंदा की है। सेना की ओर अब रावत के बयान पर सफाई आई है।

सेना प्रमुख रावत के बयान पर बवाल मचने के बाद सेना मुख्यालय की ओर से इस पर स्पष्टीकरण आया है। सेना मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनरल रावत ने अपने भाषण में कहा कि, सेना प्रमुख ने अपने भाषण में 'लीडरशिप क्वॉलिटी' का जिक्र किया था। यह कोई राजनीतिक बयान नहीं था। उन्होंने अपने भाषण में नागरिकता संशोधन ऐक्ट और एनसीआर का भी जिक्र नहीं किया। उन्होंने सिर्फ कहा कि वह कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं, जो पूरे देश की सुरक्षा को प्रभावित कर रही है।
जनरल बिपिन रावत की टिप्पणी पर विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व सैन्यकर्मियों ने कड़ी प्रतिक्रिया जतायी, जिन्होंने उन पर राजनीतिक टिप्पणी करने और ऐसा करके राजनीतिक मामलों में नहीं पड़ने की सेना में लंबे समय से कायम परंपरा से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, नेता वे नहीं हैं जो अनुचित दिशाओं में लोगों का नेतृत्व करते हैं, जैसा कि हम बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय और कॉलेज छात्रों को देख रहे हैं, जिस तरह वे शहरों और कस्बों में आगजनी और हिंसा करने में भीड़ की अगुवाई कर रहे हैं।
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल एल रामदास (रिटायर्ड) ने कहा कि जनरल रावत का बयान साफ तौर पर गलत था। सेना को दशकों पुराने सिद्धांत 'देश की सेवा करें, किसी राजनीतिक शक्ति की नहीं' का अनुसरण करें। उन्होंने कहा कि सेना के लोगों को एक निर्देश दिया जाता है कि उन्हें निष्पक्ष रहना है, न कि किसी का पक्ष लेना। उन्होंने कहा कि दशकों से ये नियम सेना की मजबूती रहे हैं।












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