समय से फ्लैट ना देने पर बिल्डर पर जुर्माना, खरीदार को हर महीने देने होंगे 50 हजार
समय से फ्लैट ना देने पर बिल्डर पर जुर्माना, खरीदारों को हर महीने देने होंगे हजार
नई दिल्ली। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा ) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए बिल्डर को आदेश दिया है कि वो उन खरीदारों को 50 हजार रुपए हर महीने दे जिनको उसने तयसमय पर फ्लैट नहीं दिए हैं। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी ने बिल्डर की खरीदार से वादाखिलाफी के मामले में इसस तरह का फैसला पहली बार किया है।अपने फैसले में रेरा ने बुलंद बिल्टेक प्रा. लि. को पजेशन में देरी की वजह से एक खरीदार को हर महीने 50 हजार रुपये जुर्माना के रूप में देने का निर्देश दिया है।

दिल्ली की महिला ने खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा
दिल्ली की रहने वाली लक्ष्मी देवी ने बुलंद बिल्टेक की ग्रेटर नोएडा सेक्टर-16 के एक प्रोजेक्ट में बुलंद एलिवेट्स में 50 लाख रुपए में 2 फ्लैट बुक कराए थे। बिल्डर ने 31 अक्टूबर, 2015 तक पजेशन देने का वादा किया था अग्रीमेंट में था कि यदि तय डेडलाइन पर फ्लैट नहीं मिला तो बिल्डर पजेशन में देरी के लिए 30 सितंबर, 2016 से महिला को जुर्माना देगा। फ्लैट ना मिलने पर लक्ष्मी ने बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। साथ ही करीब 4 महीने पहले रेरा में भी मामले की शिकायत की।

परेशान बायर्स को मिलेगी राहत
बिल्डरों से इस तरह की धोखाधड़ी का मामला पहले भी सामने आता रहा है। इस फैसले से वर्षों से पजेशन का इंतजार कर रहे लोगों को राहत मिलेगी। वहीं, इस फैसले से फ्लैट की राह देख रहे बायर्स में रेरा के प्रति विश्वास बढ़ा है। रेरा ऐक्ट के अनुसार, बिल्डर को हमें दोनों फ्लैट के लिए एक-एक फीसदी प्रति माह जुर्माना देना होगा। यह जुर्माना अक्टूबर 2017 से लगाया गया है। इसके तहत बिल्डर को हर महीने 50 हजार रुपये पजेशन में देरी के जुर्माने के रूप में देने होंगे। बता दें कि यह आदेश 17 जनवरी को भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण के सचिव अबरार अहमद ने जारी किया है। इसके तहत बिल्डर को 45 दिन में यह पैसा देना होगा।

करीब डेढ़ लोगों क हक में है फैसला
नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स ऐंड मेंबर्स असोसिएशन के अध्यक्ष अन्नु खान ने इसे सराहनीय फैसला कहा है। करीब डेढ़ लाख लोग नोएडा, ग्रेटर नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन में निवेश के बाद वर्षों से पजेशन का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे खरीदारों के लिए रेरा का यह फैसला अहम साबित होगा। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा) जुलाई 2017 से लागू है। इसके तहत जारी गाइडलाइंस पर खरा उतरने के बाद ही कोई भी बिल्डर नया प्रॉजेक्ट लॉन्च कर पाएगा।
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