सीबीआई के निदेशक पर आरोपों में सच्चाईः सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। टूजी घोटाले की जांच में गड़बड़ी मामले में सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा पर लगे आरोपों सच्चाई की ओर सुप्रीम कोर्ट ने इशारा किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबकुच ठीक नहीं चल रहा है। सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि एजेंसी में कोई भेद खोलने वाला अधिकारी है। इस जांच एजेंसी में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी है जो भेदिये का काम कर रहा है। जिसने वकील प्रशांत भूषण को दस्तावेज और फाइलों की टिप्पणी मुहैया कराई। रंजीत सिन्हा ने दावा किया कि उन्ही दस्तावेजों के आधार पर उनके खिलाफ झूठे औऱ निराधार आरोप लगाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू की पीठ के समक्ष साढ़े चार घंटे चली कार्रवाही के दौरान रंजीत सिन्हा और प्रशांत भूषण के वकीलों के बीच जमकर बहस हुई। इस दौरान सीबीआई निदेशक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप गलत हैं। सिन्हा के बचाव में कहा कि जिन दस्तावेजों औऱ फाइल की टिप्पणियों के आधार पर गैर सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस ने निदेशक के खिलाफ जांच के लिए दिए हैं।
अधिकारी रस्तोगी कर दे रहे हैं सूचना
सिन्हा के वकील ने आरोप लगाते हुए दावा किया कि रस्तोगी ही सारी जानकारी मुहैया करा रहे हैं वो । सीबीआई में वही भेदिया हैं। लेकिन विकास सिंह ने तमाम अभियुक्तों से रंजीत सिन्हा की बार-बार मुलाकात के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।












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