Rana Ayyub के खिलाफ ईडी की चार्जशीट में गंभीर आरोप, धोखाधड़ी के लिए बनाई 3 फर्जी कंपनियां

प्रवर्तन निदेशालय ने पत्रकार राणा अय्यूब (Rana Ayyub) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस के तहत चार्जशीट दायर कर दी है। ईडी ने गाजियाबाद कोर्ट में अपनी चार्जशीट दायर की है। जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है राणा अय्यूब ने तीन कंपनियों की शुरुआत की थी और केट्टो के जरिए करोड़ रुपए की फंडिंग हासिल की थी। यह ऑनलाउन फंडिंग प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए पैसे इकट्ठा किए गए। ऑनलाइन मीडिया के जरिए तीन अभियान की शुरुआत की गई, जिसमे किसानों, झुग्गी में रहने वालों के लिए पैसे 20202 में अप्रैल-मई माह में इकट्ठे किए गए, साथ ही असम, बिहार और महाराष्ट्र में राहत और बचाव के नाम पर 2020 में जून-सितंबर माह में पैसे इकट्ठे किए गए। जबकि तीसरा अभियान मई-जून 2021 में कोरोना प्रभावित लोगों के लिए पैसे इकट्ठा करने के लिए शुरू किया गया।

यूपी पुलिस की FIR के आधार पर ईडी जांच

यूपी पुलिस की FIR के आधार पर ईडी जांच

बता दें कि यूपी पुलिस ने 2021 में राणा के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसके आधार पर ईडी ने अपनी जांच मनी लॉन्ड्रिंग केस के तहत शुरू की थी। राणा पर आरोप है कि उन्होंने गैरकानूनी तरीके से चंदे के नाम पर लोगों से पैसा इकट्ठा किया। ईडी ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि चंदे के नाम पर इकट्ठा किए गए पैसों का मकसद लोगों के साथ फर्जीवाड़ा करना था। तीन अभियान के जरिए राणा ने 2.69 करोड़ रुपए का चंदा इकट्ठा किया था, जिसमे से 80.49 लाख रुपया उन्होंने विदेशी मुद्रा के तौर पर जमा किया था। हालांकि विदेशी चंदे को राणा अय्यूब को वापस करना पड़ा था क्योंकि इसके खिलाफ आयकर विभाग ने जांच की और पाया कि फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेग्युलेशन एक्ट का उल्लंघन किया है।

चंदे का पैसा पिता-बहन के अकाउंट में लिया

चंदे का पैसा पिता-बहन के अकाउंट में लिया

ईडी के अनुसार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से राणा अय्यूब ने अपने पिता और बहन के बैंक अकाउंट में लिए थे, जिसे बाद में उन्होंने अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिया था। इस पैसे में से राणा ने 50 लाख रुपए की एफडी करा ली और 50 लाख रुपए अपने दूसरे नए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। सिर्फ 29 लाख रुपए का इस्तेमाल राहत बचाव के लिए किया गया। ईडी ने कहा राहत के नाम पर खर्च किए गए पैसों को फर्जी बिल के जरिए दिखाया गया। राणा अय्यूब ने यह दिखाने की कोशिश की कि यह फंड बिल्कुल बेदाग है और इस तरह से चंदे के पैसे की लूट की गई। राणा ने विदेशों से भी फंड इकट्ठा किया था, वह भी बिना एफसीआरए एक्ट 2010 में रजिस्टर कराए।

फर्जी कंपनी बनाई

फर्जी कंपनी बनाई

जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में राणा अय्यूब पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जांच में यह पता चला है कि राणा ने फर्जी कंपनियां बनाईं, जिसका एकमात्र मकसद आम लोगों को धोखा देना था, इसके जरिए उन्होंने कई अपराध किए, इसके पैसों से एफडी कराई, बैंक खातों में रखा। बता दें कि राणा अय्यूब स्वतंत्र पत्रकार हैं, वह वॉशिंगटन पोस्ट से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए लिखती हैं। वह मोदी सरकार के खिलाफ मुखर होकर बोलने के लिए जानी जाती है। गुजरात दंगों पर भी राणा अय्यूब ने खुलकर लिखा है।

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