रक्षाबंधन 2018: कहानी एक मायावी भाई-बहन रावण और शूर्पणखा की
नई दिल्ली। देशभर में रक्षाबंधन का त्यौहार धूमधाम से रविवार 26 अगस्त को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपनी भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और बदले में भाई उनकी जीवनभर रक्षा करने का वचन देता है। रक्षाबंधन को लेकर पुराणों में कई कहानियों का जिक्र है। पुराणों में ऐसे कई भाई-बहनों की कहानियों का जिक्र है जो बहुत अच्छे थे, तो कई ऐसे भी हैं जो बुरे थे और वो अपनी बुराईयों के कारण जाने गए। लेकिन बुरे हो या अच्छे, एक भाई-बहन के रूप में वो दोनों एक-दूसरे का बहुत सम्मान करते थे।
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कहानी रावण और शूर्पणखा की
इसी प्रकार की एक कहानी है रामायण काल के रावण और शूर्पणखा की। ये दोनों की राक्षसी प्रवृत्ति के थे और इन दोनों में कई समानताएं थी। दोनों ही हिंसा का सहारा लेते थे, मायावी थे लेकिन एक-दूसरे के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने से पीछे हटने वाले नहीं थे। रावण के पास बहुत शक्तियां थी और उस काल में रावण को अपराजेय माना जाता था। तो वहीं, शूर्पणखा भेष बदलने की कला में पारंगत थी। रावण और शूर्पणखा की माता का नाम कैकसी था, कैकसी एक राक्षसी थी जबकि पिता ऋषि विश्रवा थे। वहीं, इन दोनों पर बुराई का प्रभाव अधिक और अच्छाई का प्रभाव कम था। हालांकि रावण प्रकांड विद्वान भी था।

कहानी रावण और शूर्पणखा की
इसी प्रकार की एक कहानी है रामायण काल के रावण और शूर्पणखा की। ये दोनों की राक्षसी प्रवृत्ति के थे और इन दोनों में कई समानताएं थी। दोनों ही हिंसा का सहारा लेते थे, मायावी थे लेकिन एक-दूसरे के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने से पीछे हटने वाले नहीं थे। रावण के पास बहुत शक्तियां थी और उस काल में रावण को अपराजेय माना जाता था। तो वहीं, शूर्पणखा भेष बदलने की कला में पारंगत थी। रावण और शूर्पणखा की माता का नाम कैकसी था, कैकसी एक राक्षसी थी जबकि पिता ऋषि विश्रवा थे। वहीं, इन दोनों पर बुराई का प्रभाव अधिक और अच्छाई का प्रभाव कम था। हालांकि रावण प्रकांड विद्वान भी था।

रावण-शूर्पणखा के पास बुरी शक्तियां थीं
एक बार जंगल में अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र और राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। जिसके बादशूर्पणखा ने रावण से अपने अपमान का बदला लेने को कहा। फिर क्या था, रावण ने उनसे बदला लेने की कसम खा ली और सीता का हरण कर लिया जिसके बाद आगे चलकर राम और रावण के बीच युद्ध हुआ और राम के हाथों रावण का अंत हुआ।

राम ने किया रावण का अंत
वहीं, कई जगह ये जिक्र भी है कि शूर्पणखा अपने भाई से बदला लेना चाहती थी और ये जानती थी कि धरती पर केवल अयोध्या के राजा दशरथ के बड़े पुत्र राम ही हैं जो रावण का वध कर सकते हैं। इसलिए उसने रावण को राम-लक्ष्मण के खिलाफ उकसाया और इस प्रकार अंत में राम के हाथों ही रावण का अंत हुआ। रावण ने अपने विश्व विजय अभियान के दौरान शूर्पणखा के पति का वध कर दिया था और शूर्पणखा रावण से इसका बदला लेना चाहती थी और उसने रावण के अंत की कसम ले रखी थी।
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