Rajya Sabha Election: किस पार्टी का होगा सबसे बड़ा नुकसान? 24 सीटों के चुनाव में NDA-कांग्रेस का पूरा फॉर्मूला

Rajya Sabha Election 2026: 18 जून को होने वाला राज्यसभा चुनाव सिर्फ सांसद चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश की बदलती राजनीतिक ताकत का बड़ा संकेत भी माना जा रहा है। 10 राज्यों की 24 सीटों और महाराष्ट्र-तमिलनाडु की दो उपचुनाव सीटों पर होने वाला मुकाबला कई दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है।

इस चुनाव में जहां सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) बढ़त बनाता दिख रहा है, वहीं कुछ क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा आंध्र प्रदेश और गुजरात की सियासत को लेकर हो रही है।

Rajya Sabha Election 2026

कौन जीत रहा, कौन हार रहा?

विधानसभाओं में मौजूदा संख्या बल को देखें तो 24 सीटों में से करीब 17 सीटें एनडीए गठबंधन के खाते में जाती दिख रही हैं, जबकि विपक्षी दलों को लगभग 7 सीटें मिल सकती हैं। अभी इन सीटों में से 15 एनडीए के पास हैं और पांच विपक्षी दलों के कब्जे में हैं। बाकी सीटों पर क्षेत्रीय दलों का प्रभाव है।

इस बार सबसे बड़ा नुकसान आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) को होता दिख रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की जबरदस्त जीत ने जगन मोहन रेड्डी की राजनीतिक जमीन कमजोर कर दी है। माना जा रहा है कि राज्यसभा की तीनों सीटें वाईएसआर कांग्रेस के हाथ से निकल सकती हैं।

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आंध्र प्रदेश बना सबसे बड़ा रणक्षेत्र

आंध्र प्रदेश की चार सीटों पर चुनाव होना है। इनमें अयोध्या रामी रेड्डी अल्ला, पिल्ली सुभाष चंद्र बोस और परिमल नथवानी जैसे नेता रिटायर हो रहे हैं। विधानसभा में अब टीडीपी गठबंधन की मजबूत स्थिति है, इसलिए एनडीए यहां बड़ा फायदा उठा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वाईएसआर कांग्रेस राज्यसभा में अपनी मौजूदगी खोती है, तो यह सिर्फ संसदीय नुकसान नहीं होगा, बल्कि जगन मोहन रेड्डी की राष्ट्रीय राजनीति में पकड़ भी कमजोर पड़ सकती है।

कर्नाटक में कांग्रेस के चेहरे पर मुस्कान

जहां कई राज्यों में विपक्ष मुश्किल में दिख रहा है, वहीं कर्नाटक कांग्रेस के लिए राहत लेकर आया है। यहां बीजेपी के दो और जनता दल (सेक्युलर) का एक सदस्य रिटायर हो रहा है, जबकि कांग्रेस का सिर्फ एक सांसद कार्यकाल पूरा कर रहा है।

विधानसभा में कांग्रेस के मजबूत बहुमत के कारण पार्टी एक अतिरिक्त सीट जीत सकती है। यही वजह है कि कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे का दोबारा संसद पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा को भी बीजेपी समर्थन के जरिए फिर राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा तेज है। यदि ऐसा होता है तो यह बीजेपी-जेडीएस गठबंधन की मजबूती का संकेत माना जाएगा।

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गुजरात में कांग्रेस पर संकट

गुजरात में कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बजती दिख रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को काफी कमजोर कर दिया था। अब राज्यसभा चुनाव में भी पार्टी की मौजूदगी खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है।

यहां चार सीटों पर चुनाव होना है। बीजेपी के रामभाई मोकरिया, अमीन नरहरी हिराभाई और रमिला बारा का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जबकि कांग्रेस के शक्तिसिंह गोहिल भी रिटायर हो रहे हैं। मौजूदा संख्या बल को देखते हुए भाजपा आसानी से बढ़त में दिखाई दे रही है। अगर कांग्रेस यहां सीट गंवाती है, तो यह सिर्फ एक चुनावी हार नहीं बल्कि गुजरात की राजनीति में बड़ा प्रतीकात्मक झटका माना जाएगा।

तमिलनाडु की सीट क्यों बनी सबसे दिलचस्प?

तमिलनाडु की उपचुनाव सीट इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) पहली बार राज्यसभा में एंट्री करती है या कांग्रेस को समर्थन देती है, इस पर सबकी नजरें हैं। सूत्रों के मुताबिक टीवीके कांग्रेस को सीट देने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो दक्षिण भारत में विपक्षी एकजुटता का बड़ा संदेश जा सकता है। यही वजह है कि इस सीट को सिर्फ उपचुनाव नहीं, बल्कि 2029 की राजनीति की शुरुआती बिसात भी माना जा रहा है।

किन राज्यों में होंगे चुनाव?

राज्यसभा चुनाव इन राज्यों में होंगे:

  • कर्नाटक - 4 सीट
  • आंध्र प्रदेश - 4 सीट
  • गुजरात - 4 सीट
  • राजस्थान - 3 सीट
  • मध्य प्रदेश - 3 सीट
  • झारखंड - 2 सीट
  • मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम - 1-1 सीट

इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में एक-एक उपचुनाव भी होगा।

इन दिग्गज नेताओं का खत्म हो रहा कार्यकाल

इस चुनाव में कई बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • मल्लिकार्जुन खरगे
  • एच. डी. देवेगौड़ा
  • दिग्विजय सिंह
  • जॉर्ज कुरियन
  • रवनीत सिंह बिट्टू
  • दीपक प्रकाश
  • नीरज डांगी
  • नाबाम रेबिया

इन नेताओं की वापसी या विदाई आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।

राज्यसभा का गणित क्यों है इतना अहम?

राज्यसभा में संख्या बल सिर्फ कानून पास कराने तक सीमित नहीं होता। केंद्र सरकार की नीतियों, संवैधानिक संशोधनों और बड़े राजनीतिक फैसलों पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। अगर एनडीए इस चुनाव में अपनी संख्या बढ़ाने में सफल रहता है, तो संसद के ऊपरी सदन में उसकी पकड़ और मजबूत होगी।

वहीं विपक्ष के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बचाने की परीक्षा बन चुका है। खासतौर पर वाईएसआर कांग्रेस और कांग्रेस जैसी पार्टियों के लिए यह मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश और भविष्य की रणनीति का भी चुनाव माना जा रहा है।

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