क्या उपराष्ट्रपति बनने वाले हैं राज्यसभा के उपसभापति Harivansh, अचानक राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद चर्चा तेज
Rajya Sabha Deputy Chairman Harivansh Vice President: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार(21 जुलाई) को अपने पद से संविधान के अनुच्छेद 67(A) के तहत स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। यह खबर सामने आते ही देश की सियासी हलचल तेज़ हो गई है। धनखड़ का यह कदम कई राजनीतिक अटकलों को जन्म दे रहा है, क्योंकि यह फैसला न तो अपेक्षित था और न ही इसकी पूर्व सूचना दी गई थी।
इस घटनाक्रम के कुछ ही घंटों के भीतर, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की अचानक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात ने और भी ज्यादा चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक अब सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है क्या हरिवंश अगला उपराष्ट्रपति बनने जा रहे हैं?

क्या हरिवंश नारायण सिंह बन सकते हैं अगले उपराष्ट्रपति?
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद नया उपराष्ट्रपति कौन होगा, इस पर अटकलें तेज़ हैं। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह इस रेस में एक संभावित चेहरे के रूप में उभरे हैं। उनकी हालिया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दी है।
सोशल मीडिया पर क्यों छाई चर्चा?
सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स यह दावा कर रहे हैं कि हरिवंश नारायण सिंह को उपराष्ट्रपति पद पर नियुक्त किया जा सकता है। इसके पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं
🔸 बिहार विधानसभा चुनाव करीब हैं - ऐसे में NDA गठबंधन को एक बार फिर बिहार में मज़बूत स्थिति बनानी है।
🔸 JDU का सशक्त प्रतिनिधित्व - हरिवंश नारायण सिंह JDU से राज्यसभा सदस्य हैं और नीतीश कुमार के क़रीबी माने जाते हैं।
🔸 नीतीश कुमार को साधना जरूरी - अगर NDA हरिवंश को उपराष्ट्रपति बनाता है तो इसे नीतीश कुमार को खुश रखने और JDU को एक महत्वपूर्ण संदेश देने के रूप में देखा जाएगा।
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गठबंधन की मजबूती के लिए रणनीतिक दांव?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरिवंश नारायण सिंह को उपराष्ट्रपति बनाना सिर्फ एक संवैधानिक नियुक्ति नहीं बल्कि एक रणनीतिक गठबंधन समीकरण का हिस्सा भी हो सकता है। इससे NDA को बिहार में जमीनी समर्थन के साथ-साथ सहयोगी दलों को एकजुट रखने में मदद मिल सकती है।
उपराष्ट्रपति की दावेदारी नहीं इस वजह से हुई मुलाकात?
बता दें कि भारत के उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं। इस भूमिका में वे उच्च सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता करते हैं। लेकिन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संसद सत्र के बीच में ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे राज्यसभा के सभापति का पद फिलहाल रिक्त हो गया है।
ऐसे में, जब तक नया उपराष्ट्रपति निर्वाचित नहीं हो जाता या राष्ट्रपति किसी अन्य सदस्य को कार्यवाहक सभापति के रूप में नियुक्त नहीं कर देतीं, तब तक राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ही सदन की कार्यवाही का संचालन करते रहेंगे। संभावना है कि राष्ट्रपति से उनकी मुलाकात इसी संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के मद्देनज़र हुई हो। हालांकि, अब तक इस मुलाकात के उद्देश्य को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।
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